ललितपुर। स्वास्थ्य विभाग द्वारा कराए गए दो सर्वे में मुख व दंत रोग की उपलब्धता के आंकड़े सामने आए हैं। स्थिति यह है कि ग्रामीण स्तर पर मुख व दंत रोग चिकित्सक न के बराबर हैं। ऐसे में राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन कार्यक्रम के अंतर्गत ग्रामीणों को भी मुख व दंत रोग का इलाज उपलब्ध कराया जाएगा।
इसमें सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र व प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पर मुख और दंत रोग के इलाज की सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी।
जिले में जल्द ही नेशनल ओरल हेल्थ प्रोग्राम के तहत ग्रामीण क्षेत्र में स्थित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पर चिकित्सकों की तैनाती की जाएगी तथा नई मशीनरी की खरीद की जाएगी। योजना का मकसद दंत चिकित्सा को लेकर सामाजिक चेतना लाना और बेहतर चिकित्सा उपलब्ध कराना है।
डेंटल काउंसिल ऑफ इंडिया के आंकड़ों की मानें तो एक अरब से ज्यादा आबादी वाले देश में केवल डेढ़ लाख ही दंत चिकित्सक मौजूद हैं। सर्वे के मुुुुताबिक देश की 72 फीसदी जनता को दंत चिकित्सा उपलब्ध नहीं हो पा रही है। ऐसे में वह दांतों को लेकर लापरवाह बने हुए हैं और निर्धारित समय से पूर्व ही लोगों के दांत खराब हो जाते हैं अथवा गिर जाते हैं। इन्हीं सर्वे के आधार पर केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने ओरल हेल्थ को लेकर नए अभियान की शुरूआत की है।
पीएचसी और सीएचसी पर सुविधा
वर्तमान में ग्रामीण स्तर पर दंत व मुख रोग के इलाज के ज्यादा संसाधन ग्रामीण स्तर पर उपलब्ध नहीं हैं। इसी को ध्यान में रखते हुए नेशनल ओरल हेल्थ प्रोग्राम को तैयार किया गया है। इस कार्यक्रम की गाइड लाइन जारी कर दी गई है, जिसके तहत जिला अस्पताल के अतिरिक्त पीएचसी और सीएचसी स्तर पर भी ओरल हेल्थ को लेकर तमाम संसाधन उपलब्ध कराए जाएंगे।
पीएचसी व सीएचसी में इलेक्ट्रॉनिक चेयर, ऑटोक्लोव, मैनुअल दांतों की सफाई के उपकरण, डेंटल एक्सरे यूनिट, अल्ट्रासोनिक स्केलर, लाइट क्योर गन, इंप्रेसन ट्रे, रुट कैनाल उपकरण आदि उपलब्ध कराएं जाएंगे। इसके अलावा स्टाफ की नियुक्ति भी संविदा पर की जाएगी।
पीपीपी मॉडल भी अपनाया जाएगा
ग्रामीण स्तर पर ओरल हेल्थ प्रोग्राम की सफलता के लिए योजना के तहत पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप (पीपीपी) का भी सहयोग लिया जाएगा। जनपद स्तर पर मौजूद दंत महाविद्यालयों, दंत चिकित्सा संगठन व गैर सरकारी संगठन को इस योजना में जोड़ा जाएगा।
योजना का मुख्य उद्देश्य लोगों की मुख व दंत रोग को लेकर लापरवाह सोच को बदलना है, इसके लिए जागरूकता अभियान चलाए जाएंगे। इसके साथ ही एएनएम, आशा, आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों व शिक्षकों को भी ओरल हेल्थ के प्रति जागरूकता प्रशिक्षण दिया जाएगा।
नेशनल ओरल हेल्थ प्रोग्राम के तहत नई गाइड लाइन जारी की गई है, जिसके आधार पर जिले में ग्रामीण स्तर पर भी ओरल हेल्थ को लेकर सुविधाएं उपलब्ध कराईं जाएंगी।
- डॉ. सतेंद्र कुमार, मुख्य चिकित्सा अधिकारी, ललितपुर।