जखौरा/ललितपुर। जखौरा क्षेत्र के ग्राम किसलवास स्थित हनुमान मंदिर में सात दिवसीय श्रीमद् भागवत कथा का आयोजन किया जा रहा है। तीसरे दिन की कथा में कथा व्यास आरती वृंदावन धाम ने सुखदेव के जन्म एवं परीक्षित की कथा सुनाई।
उन्होंने कहा कि सुखदेव के जन्म के बारे में यह कहा जाता है कि ये महर्षि वेदव्यास के अयोनिज पुत्र थे और 12 वर्ष तक माता के गर्भ में रहे। भगवान शिव, पार्वती को अमर कथा सुना रहे थे। पार्वती जी को कथा सुनते-सुनते नींद आ गई और उनकी जगह वहां बैठे एक शुक ने हुंकारी भरना प्रारंभ कर दिया। राजा परीक्षित का जन्म महाभारत काल में हुआ था। कुरुक्षेत्र युद्ध के बाद जब पांडवों का वंश समाप्त होने के कगार पर था तब अर्जुन के पुत्र अभिमन्यु की पत्नी उत्तरा के गर्भ में परीक्षित पल रहे थे। अश्वत्थामा ने ब्रह्मास्त्र का प्रयोग किया, जिससे उत्तरा का गर्भ खतरे में पड़ गया। भगवान श्रीकृष्ण ने अपने योगबल से उत्तरा के गर्भ में प्रवेश करके परीक्षित की रक्षा की और उन्हें पुनर्जीवित किया। इसलिए उन्हें परीक्षित कहा गया, जिसका अर्थ है परीक्षा या जिसकी परीक्षा ली गई हो। परीक्षित कुरुवंश के एकमात्र उत्तराधिकारी थे और उन्होंने हस्तिनापुर के राजा के रूप में शासन किया। इस मौके पर कथा यजमान लीला देवी, वीरन सिंह राजपूत एवं ग्राम वासी मौजूद रहे।