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पानी की तलाश में वन्य पशुओं का पलायन

Thu, 28 Apr 2016 12:47 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
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water problem, jhansi news - फोटो : demo
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ललितपुर। आसमान से उगल रही आग और तप रही धरती में वन्य पशुओं का जीना दूभर हो गया है। जंगली क्षेत्र के अधिकांश जल स्रोत पूरी तरह सूख गए हैं, उनमें उड़ रही धूल से जानवरों का पलायन शुरू हो गया है। हालात यह है कि जानवर पानी की तलाश में एक वन रेंज से दूसरी वन रेंज में पहुंच कर अपने कंठ तर कर रहे हैं।
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बुंदेलखंड में सूखे के कारण भोजन के साथ पानी की गंभीर समस्या खड़ी हो गई है। ललितपुर में तालाब, पोखर और नदियों के सूखने से परिस्थितियां विषम हो गई हैं। जंगल में रहने वाले जानवरों के सामने भी पीने के पानी का संकट उत्पन्न हो गया है। 74 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में फैले जंगली इलाके में करीब पांच सैकड़ा जल स्रोत हैं। इनमें बुंदेलखंड पैकेज से चेकडैम, तालाब, वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम से पानी का इंतजाम किया गया है।

वर्तमान में अधिकतर जल स्रोतों में पानी सूखने से धूल उड़ रही है। ललितपुर वन रेंज में बेतवा नदी, नारायणी नदी, रानीपुरा चेकडैम, जाखलौन चेकडैम, केरखों व जीराखों में ही पानी बचा है। इस रेंज के करीब 10 चेकडैम, 15 तालाब और इतनी ही बंधी सूखी पड़ी हैं। मड़ावरा वन रेंज में धसान नदी, बंडई नदी का पानी जानवरों के पीने का सहारा बना हुआ है। गौना वन रेंज में जामनी नदी, सोन नदी, पांडव वन के आसपास में भराव क्षेत्र पानी रह गया है। घुंसी नदी का पानी सूख गया है। महरौनी वन रेंज में जामनी नदी, सजनाम नदी से जानवर अपनी प्यास बुझा रहे हैं।
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बार वन रेंज में प्राकृतिक जल स्रोतों की कमी है। इससे जानवर शहजाद व सजनाम नदी के पानी पर निर्भर हैं। वर्तमान में गाइयाघाट के पास सजनाम नदी का पानी सूख गया है। चंदन वन रेंज में ट्यूबवेल से पानी का इंतजाम किया जा रहा है। इससे ललितपुर जिले की वन रेंजों में पानी की उपलब्धता का अंदाजा लगाया जा सकता है।


जल स्रोतों के सूखने से जंगली जानवरों का यहां वहां भटकना आरंभ हो गया है। इस जद्दोजहद में वन रेंज का दायरा समाप्त हो गया है। जानवर एक वन रेंज से दूसरी वन रेंज में पानी की तलाश में जा रहे हैं। इस तरह जानवर अपना जीवन बचा रहे हैं।

मौजूदा परिस्थितियों में विभागीय अफसर खुद को असहाय पा रहे हैं। उनका कहना है कि बारिश होने पर ही सूखे जल स्रोतों का भरा जा सकता है। इससे पूर्व जंगलों में पानी का पृथक से इंतजाम करना बेहद मुश्किल काम है।

इतने हैं जानवर
जिले के जंगली क्षेत्र में करीब 11 हजार जानवर बताए जाते हैं। इनमें नीलगाय, बंदर, चिंकारा, चीतल, सुअर, लंगूर, जंगली भेड़, खरगोश, सांभर, चौसिंह, रीछ, लकड़बग्घा आदि शामिल हैं।

पक्षी भी कर गए पलायन
वर्तमान मौसम पक्षियों के लिए प्रतिकूल हो गया है। विशेषकर जलीय पक्षी, नदी, तालाब और पोखरों के सूखने से पलायन कर गए हैं। इनमें सिलेटी सवन, सुर्खाय बत्तख, अबलख बत्तख, छोटा लालसर, जलीय बत्तख, सिलही, ढोमरा, सीकपर, जल कौवा, ठेकरी शामिल हैं। इसके अलावा नम भूमि के पक्षियों ने अपना ठिकाना बदल दिया है। इनमें कुर्च, घोंघिल, गजपांव, किलकिला, छोटा राजहंस, चौबाहा, नरी अंजन, वगुला, सारस, टिटहरी सम्मिलित हैं।

जानवर पानी के आसपास रहना पसंद करते हैं। वर्तमान में नदियों का पानी अब पाकेट (भराव क्षेत्र) में रह गया है, इसलिए जानवर पानी की उपलब्धता के पास जा रहे हैं। सर्दी के मौसम में बाहर से आने वाले पक्षी इस मौसम में वापस चले जाते हैं। लोकल पक्षी नमी वाले क्षेत्रों में अपना डेरा बनाए हैं।
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वीके जैन, प्रभागीय निदेशक
सामाजिक वानिकी प्रभाग ललितपुर।
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