पुलवारा (ललितपुर)। जिला प्रशासन के निर्देशों को ताक पर रख कर आपूर्ति विभाग द्वारा राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम की सूची बनाने में फर्जीवाड़ा हुआ है। इंटरनेट पर सूची प्रकाशित होने के बाद जब लोगों ने अवलोकन किया, तो सच्चाई सामने आई।
एक जनवरी से राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम लागू होना है। इसके तहत पात्रों को दो रुपये किलो गेहूं और तीन रुपये किलो चावल दिया जाना है। इंटरनेट पर प्रकाशित सूची में कई पात्र लोगों के नाम गायब मिले, जिन लोगों के सूची में नाम हैं, उनमें बड़े पैमाने पर गड़बड़ियां देखने को मिलीं। किसी घर के मुखिया का नाम गलत है, किसी के पिता एवं किसी की जाति ही बदल दी गयी।
इससे लोगों को अपना नाम देख पाना टेढ़ी खीर साबित हो रही है। सूची से अपना नाम गायब होने पर गरीब व अनभिज्ञ लोग कोटेदार से जानकारी के बारे में पूछते रहते हैं। पूछने पर कोटेदार जिला पूर्ति अधिकारी कार्यालय पर फार्म भरकर फीड कराने की सलाह देकर अपना पल्ला झाड़ लेते हैं।
लोगों ने खाद्य एवं रसद विभाग के टोल फ्री नंबर पर बात की तो पता चला कि ग्रामीण क्षेत्र की जिम्मेदारी ग्राम विकास अधिकारी की है, जब लोगों ने ग्राम विकास अधिकारी से जानकारी करनी चाही, तो उनका मोबाइल अक्सर बंद रहने के कारण लोगों को सही जानकारी नहीं मिल पा रही है। यहां, यह बताना भी जरूरी है कि लोगों द्वारा आनलाइन फार्म भरने के बाद उसकी प्राप्ति रसीद (प्रिंट आउट) कोटेदार के पास जमा कर दिया गया था,
तो फिर किस आधार पर पात्र लोगों के नाम सूची से काट दिए गए ? इस कारण पूर्ति विभाग के जिम्मेदार लोगों द्वारा तैयार की गयी सूची पर सवालिया निशान लग रहे हैं। लोगों ने जिलाधिकारी से मामले की जांच कर समस्या का समाधान करने की मांग की है।
जो लोग छूट गए हैं, उनका फार्म भरवाया जाएगा तथा सत्यापन कराया जाएगा। अपात्रों को सूची से हटाया जाएगा तथा पात्रों के नाम जोड़े जाएंगे।
- डीएस राम
जिला पूर्ति अधिकारी
सात माह से नहीं मिला मानदेय
सरकार द्वारा सरकारी स्कूलों में अध्ययनरत छात्रों को स्कूल में ही मिड डे मील बनाने के लिए विद्यालयों में रसोइयों की तैनाती की गई है। रसोइयों को एक हजार रुपये मासिक मानदेय देने की व्यवस्था है। लेकिन, पिछले सत्र के माह मई से रसोइयों का मानदेय नहीं मिलने के कारण उनके सामने रोजी- रोटी का संकट पैदा हो गया है।
सात माह से रसोइयां परेशान हैं। उन्होंने जल्द से जल्द मानदेय दिलाने की मांग की है। मांग करने वालों में चत्तो रैकवार, ब्रजेश, ऊषा, शगुन आदि शामिल रहीं।