ललितपुर। यहां कई बांध परियोजनाएं प्रस्तावित हैं, जिनके समय से पूर्ण न होने पर उनकी लागत कई गुना बढ़ गई है। 2008 से 2012 के बीच शुरू भौंरट व कचनौंदा बांध परियोजनाएं 2015 से 2022 तक पूर्ण होनी थीं, लेकिन अब भी अधूरी हैं। वहीं, बार-बार समय बढ़ाए जाने से स्वीकृति के समय इनकी जो लागत थी, उससे कई गुना अधिक धनराशि खर्च हो चुकी है।
जनपद में 14 बांध परियोजनाएं हैं, जिसमें से सात पुरानी हैं। वर्ष 2006 के बाद स्वीकृत कई बांध परियोजनाएं ऐसी हैं, जिनका लागत से कहीं अधिक में निर्माण हुआ है। वर्ष 2008 में 85.40 करोड़ से तैयार की गई भौंरट बांध परियोजना की लागत वर्तमान में 1237 करोड़ रुपये हो गई है। वहीं, कचनौंदा बांध परियोजना 2012 में 263 करोड़ की लागत से तैयार की गई थी, वर्तमान में उसकी लागत 594 करोड़ हो चुकी है। ये दोनों परियोजनाएं अब भी पूर्ण नहीं हुई हैं।
बंडई, भावनी, लोअर रोहिणी व जमरार बांध परियोजना भी ऐसी हैं, जिनकी लागत स्वीकृति के मुकाबले निर्माण में देरी होने के कारण कई गुनी बढ़ गई है। हालांकि, भौंरट बांध में वन विभाग का पेंच फंसा हुआ है। वन विभाग की भूमि इस बांध क्षेत्र में डूब रही है। इसके एवज में सिंचाई विभाग ने भूमि वन विभाग को नहीं दी। इसके चलते इस बांध परियोजना में देरी हो रही है। वहीं, कचनौंदा बांध परियोजना में अधिग्रहीत भूमि का अभी मुआवजा वितरित नहीं हुआ है। इस परियोजना को दिसंबर 2025 तक बढ़ा दिया गया है, जबकि इसे 2022 तक पूर्ण होना था।
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बांध का नाम - मूल परियोजना की लागत- पुनरीक्षित लागत (करोड़ में)
भौंरट बांध - 85.40 - 1237.25
कचनौंदा बांध- 263.65 - 594.46
बंडई बांध - 232.80 - 303.54
भावनी बांध - 369.18 - 512.74
लोअर रोहिणी - 60.93 - 218.50
जमरार बांध - 66.23 - 326.10
बांध परियोजनाओं में किन कारणों से देरी हो रही है, इसकी जानकारी सिंचाई विभाग से ली जाएगी। यह बात सही है कि देरी के कारण परियोजनाओं की लागत बढ़ जाती है। भौंरट बांध में वन विभाग की भूमि देने का प्रकरण शासन स्तर पर है, इससे देरी हो रही है।
अक्षय त्रिपाठी, जिलाधिकारी।