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अब किसानों के हाथों में होगी नहरों की कमान

Thu, 31 Dec 2015 01:53 AM IST
ब्यूरो
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ललितपुर। उत्तर प्रदेश में सबसे ज्यादा बांध वाले जिले का गौरव रखने वाले ललितपुर में किसानों की हालत पानी की कमी से बेहाल बनी हुई है। इसके पीछे का कारण बांधों में लगातार पानी का घटता भंडारण, बढ़ती सिल्ट और नहरों का क्षतिग्रस्त होना है।
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इसे देखते हुए राज्य सरकार की ओर से जिले के तीन बांध और उनकी नहरों के कायाकल्प की योजना पर अमल किया जा रहा है। इसके लिए किसानों की समितियां गठित की जाएंगी, जो नहरों का संचालन करेंगी।

जिले के तीन बांध सजनम, जामनी व रोहिणी के जरिये किसानों को सिंचाई के लिए पानी उपलब्ध नहीं हो पा रहा है। इसे देखते हुए राज्य सरकार की ओर से जिले के तीनों बांधों व उनकी नहरों के कायाकल्प की योजना पर अमल किया जा रहा है।
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विश्व बैंक से सहायतित योजना प्रोजेक्ट एक्टीविटी कोर टीम (पैक्ट) के तहत तीनों बांधों और नहरों के पुनरोद्धार का काम चल रहा है। योजना के तहत बांधों व नहरों का पुनरोद्धार ही नहीं होगा, बल्कि नहरों के संचालन के लिए किसानों की विशेष समितियों का गठन भी किया जाएगा। इसके लिए तीन समितियां पानी पंचायत, कोलाबा समिति और अल्पिका समिति गठित होंगी।

तीनों बांधों की नहरों का पूर्ण रूप से पुनरोद्धार होने के बाद इनके संचालन का जिम्मा विभाग द्वारा गठित समितियां करेंगी। हालांकि, पहले पैक्ट योजना के तहत बुंदेलखंड के सभी जिलों के बांध शामिल किए गए थे, लेकिन बाद में बुंदेलखंड से केवल ललितपुर जनपद और जिले के केवल तीन बांध ही योजना में शामिल किए गए हैं।

 
भूजल पर बढ़ी निर्भरता  
जिले में सबसे ज्यादा बांध होने के बाद भी पिछले 10 साल में सिंचाई के लिए लगातार भूजल पर निर्भरता बढ़ती जा रही है। सबसे ज्यादा भूजल का दोहन सिंचाई के लिए ब्लॉक बार में किया जा रहा है। इसी कारण सेंट्रल ग्राउंड वाटर बोर्ड ने बार ब्लॉक को भूजल के मामले में सेमी क्रिटिकल केटेगरी में शामिल किया है।

साथ ही सेंट्रल ग्राउंड वाटर बोर्ड के सर्वे के बाद जिले के तीन बांधों का पुनरोद्धार करने का निर्णय लिया गया है। वर्तमान में बार ब्लॉक में करीब 70 फीसदी सिंचाई नलकूप के जरिए हो रही है।

बर्बाद हो रहा था पानी
सजनम, जामनी और रोहिणी बांध का पानी नहरों के जरिये किसानों को सिंचाई के लिए उपलब्ध कराया जाता है। सिंचाई विभाग के सर्वे में सामने है कि सजनम बांध की नहरों से 2.33 क्यूसेक प्रति किलोमीटर, जामनी बांध केनाल में 1.84 क्यूसेक प्रति किमी और रोहिणी बांध नहर से 1.09 क्यूसेक प्रति किमी पानी की बर्बादी हो रही है।

इसका सबसे बड़ा कारण नहरों का कच्चा होना और नहरें वर्षों पुरानी होने के कारण क्षतिग्रस्त होना है। इन्हीं कारणों को देखते हुए तीनों बांधों व उनकी नहरों के पुनरोद्धार करने का काम तेजी से चल रहा है। वर्तमान में 30 फीसदी काम पूरा हो चुका है। कार्य के पूर्ण होने के बाद बांधों पर निर्भर किसानों को भरपूर पानी मिल सकेगा।

किसानों को मिलेगा लाभ
वर्तमान में तीनों बांधों का अभी तक महरौनी ब्लॉक के ही किसान लाभ ले पाते हैं, इसका कारण ब्लॉक का बांधों के अपर साइड पर होना है। जबकि, ब्लाक बार और बिरधा के ज्यादातर गांव टेल साइड (नीचे की तरफ) पर आते हैं। इनकी टेल तक पानी नहीं पहुंच पाता है।

सजनम बांध की 105 किमी, जऱमनी बांध की 196 किमी नहर, रोहिणी बांध की नहर 20 किमी व सहायक माइनर को सुधारने का कार्य किया जा रहा है। इससे बार और बिरधा क्षेत्र के किसानों को लाभ मिलेगा। इस पर 165 करोड़ रुपए खर्च किया जा रहा है। कार्य जुलाई 2016 तक पूरा होने की उम्मीद है।

जल्द बनेगी समिति
तीनों बांधों की नहरों के पुनरोद्वार पर वर्ल्ड बैंक की ओर से मिले बजट को खर्च करने के बाद सरकार की योजना है कि किसान खुद ही नहरों का संचालन और सुरक्षा की जिम्मेदारी संभालें। इसी को देखते हुए पानी पंचायत के तहत अल्पिका व कोलाबा समिति बनाई जाएंगी।

विभाग की मानें तो जल्द ही विभिन्न समितियों के लिए सदस्यों का चयन करके उनके नाम लखनऊ भेजे जाएंगे। समितियां बनने के बाद नहरों के क्षतिग्रस्त होने पर किसान खुद  पस में रुपए एकतित्र करेंगे और इतनी ही राशि विभाग से प्राप्त कर नहरों को सही करा सकेंगे।

सजनम, रोहिणी व जामनी बांधों को बने वर्षों हो चुके हैं, इस कारण इन बांधों की क्षमता पर असर पड़ा है। पैक्ट योजना के तहत तीनों बांधों की नहरों का पुनरोद्वार किया जा रहा है। इसके अलावा किसानों की समितियां बनाने का काम शुरू हो चुका है। जल्द ही समितियों का गठन होने के बाद नहरों का संचालन उनके जिम्मे कर दिया जाएगा।
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- इंजी. एके झा
अधिशाषी अभियंता, सिंचाई निर्माण खंड।
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