ललितपुर। श्री दीपचंद्र चौधरी महाविद्यालय में अगस्त क्रांति की 80 वीं वर्षगांठ मनाई गई। प्रबंधक ने कहा कि अगस्त क्रांति में करो या मरो की गूंज ने युवा शक्ति को सहसा नींद से जगा दिया उनके अंदर ऐसी चिन्गारी उठी कि उसे लपट बनने से कोई रोक नहीं पाया। प्रो. भगवत नारायण शर्मा ने अंग्रेजों के साम्राज्य का सूर्य गांधी की आंधी में अस्ताचल की ओर अग्रसर हो उठा। सात अगस्त 1942 को जैसे ही गांधी ने देशवासियों को करो या मरो का मूलमंत्र देकर अंग्रेजों भारत छोड़ो का शंखनाद किया।
आंदोलन में लगभग दो हजार सेनानी पुलिस के हाथों शहीद हुए और 60 हजार जेल गए। आंदोलन ने आम जनता को इतना झकझोर दिया कि जनता की धड़कती नाड़ी पर हाथ रखते हुए शायर अकबर इलाहाबादी को महसूस हुआ। स्वतंत्रता संग्राम के अहिंसक सेनापति गांधी ने अगस्त क्रांति के समय जनशक्ति की मंशा भांपकर, जब अंग्रेजो भारत छोड़ो का जयघोष किया। तब अपने धोती परिधान (बुंदेली में पर्दनी या परदनियां) को छोड़ा नहीं, बल्कि धोती को मोड़कर उसे एक हाफ पेंट में बदलकर वे एक सैनिक की भांति कूद पड़े। सन 1942 के महासंग्राम में भाग लेने वाले योद्धाओं की लंबी माला में ललितपुर जैसे अति छोटे से जिले के दो शहीद होने वाले मोतियों में से एक हैं बाबूलाल फूलमाली, दूसरे डालचंद जैन की शहादत की चमक कभी भी धुंधली नहीं पड़ सकती। प्राचार्य डॉ. जेएस तोमर ने कहा कि अगस्त क्रांति स्वतंत्रता संग्राम का 15 अगस्त 1947 से पूर्व का सेमीफाइनल है, जिसमें कभी न डूबने वाले अंग्रेजी साम्राज्य के सूर्य को भारतभूमि पर डुबो दिया। इस मौके पर प्रबंधतंत्र के प्रदीप चौधरी, प्रवीण चौधरी, विकास चौधरी, गौरव चौधरी, प्रतीक चौधरी के अलावा प्रो. आदित्य मिश्रा, राकेश राजन, मनीष कुमार, नीरज सिंह, डॉ. रामेंद्र कुमार, राहुल चौबे, ब्रजेश पटैरिया, अभिषेक रावत, अंशुल दुबे, महेंद्र झां, शुभम सिंघई, डॉ सल्लन अली, सतीश कुमार, प्रदीप कुमार, नितिन जैन, रीमा, सपना, प्रदीप गंगेले, अनुज सेन, भगवानदास, मुकुल आदि मौजूद रहे।