ललितपुर। भाई-बहन के अपूर्व स्नेह का प्रतीक रक्षाबंधन पर्व जनपद में पूर्ण आस्था व स्नेह के साथ मनाया गया। जनपद में इस बार रक्षाबंधन का पर्व दिनभर शुभ मुहूर्त में मनाया गया। बहनों ने भाइयों की कलाइयों पर आस्था का प्रतीक रक्षासूत्र बांधकर उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की। रक्षाबंधन पर्व को लेकर महंगाई के बाद भी शहर में काफी उत्साह देखने को मिला।
बृहस्पतिवार को श्रावण मास की पूर्णिमा का पर्व भद्रा मुक्त रहा, जिससे लोगों ने सुबह ही शुभमुहुर्त में बहनों से राखी बंधवाई। लेकिन दोपहर 12 बजे तक शुभ मुहूर्त में ही रक्षाबंधन पर्व मनाने की लोगों में उत्सुकता रही। हालांकि दोपहर डेढ़ बजे से भी देर शाम तक भी निर्धारित मुहूर्त में राखी बंधवाने का सिलसिला जारी रहा। बृहस्पतिवार को नगर में रक्षाबंधन पर्व पूर्ण श्रद्धा व आस्था के साथ मनाया गया। छोटे बच्चों के साथ ही बड़ों में भी त्योहार के प्रति उत्सुकता देखने को मिली। प्राचीन परंपरा के अनुसार बहनों ने भाईयों के माथे पर तिलक लगाने के बाद उनकी आरती उतारी और कलाई पर रक्षासूत्र बांधकर मुंह मीठा कराया।
भाईयों ने भी बहिनों के सुख मय जीवन की कामनाएं कीं और सामर्थ्य अनुसार उपहार भेंट किए। अन्य जनपदों से भाइयों ने आकर बहनों से राखी बंधवाई और परंपरा अनुसार पर्व मनाया। हिंदू रीति रिवाज के अनुसार सुबह से ही लोगों ने भगवान विष्णु के स्वरूप ठाकुरजी की विधिविधान के साथ पूजा-अर्चना की और बहनों से राखी बंधवाकर त्योहार मनाया। इसके बाद पंचक लगने के कारण दोपहर से पूर्व ही महिलाओं ने घरों में बोए जवारों का पूजन किया और तालाबों पर विसर्जन किया।
महंगाई की मार
ललितपुर। शहर के बाजार कई दिनों पूर्व से ही सज गए थे। राखी की दुकानों में तरह-तरह की महंगी से महंगी राखियां बिकीं। शहर में मिठाइयों की दुकानें भी सजाई गईं, कई दुकानों के स्टाल तो सड़कों पर भी लगाने पड़े। लेकिन महंगाई और गरीबी से जूझ रहे जनपदवासियों को जेब दिल खोलकर पर्व मनाने की इजाजत नहीं दे रही थी। हालांकि मिठाई बिना त्योहार मनाया भी नहीं जाता, इसलिए लोगों ने महंगाई के बाद भी दिल खोलकर मिठाई खरीदी। कई होटलों पर तो मिठाईयां दोपहर से पहले ही खत्म हो चुकी थी।
जब लक्ष्मी ने बांधी बली की कलाई में राखी
मान्यता के अनुसार भगवान विष्णु ने वामन अवतार लेकर राजा बली से दान मांगा। राजा बली ने भगवान विष्णु को वचन दिया कि 3 डग रखकर वह जितना भी धन संपत्ति अर्जित कर सकते हो तो कर लो। भगवान विष्णु ने 2 डग में ही संपूर्ण पृथ्वी व आकाश नाप डाला। तीसरे डग के लिए जब कोई चीज शेष नहीं बची तो राजा बली समझ गए कि वामन रूप धारण किये कोई और नहीं भगवान विष्णु हैं। उन्होंने भगवान से क्षमा याचना की।
तब भगवान ने राजा बली से वरदान मांगने को कहा। राजा बली ने उनकी रक्षा करने का वर मांगा। भगवान विष्णु ने तथास्तु कहकर उनकी चौकीदारी शुरू कर दी। बाद में जब माता लक्ष्मी को इसकी जानकारी हुई तो वह राजा बली के पास पहुंचीं और उन्होंने राजा बली की कलाई पर रक्षा सूत्र बांधा। राजा बली ने माता लक्ष्मी से कहा कि वह उनके लिए क्या दे सकते हैं तब माता लक्ष्मी ने कहा कि एक बहिन को अपने पति से प्रिय अन्य कोई वस्तु नहीं होती। राजा बली ने माता लक्ष्मी का आशय समझ गए और भगवान विष्णु जी को लक्ष्मीजी के साथ विदा किया। तभी से रक्षाबंधन पर्व मनाने की परंपरा मानी जाती है।
स्टेशनों, बस स्टेंड पर रही भारी भीड़
रक्षाबंधन पर्व पर लोगों के घर लौटने के चलते ट्रेनों में भारी भीड़ रही। रेलवे स्टेशनों पर प्लेटफार्म पर ट्रेनों के समय काफी भीड़ भाड़ रही। रिजर्वेशन फुल होने के चलते कई लोगों ने तो वेटिंग टिकट लेकर भी यात्रा की। ट्रेनों में रिजर्वेशन कोचों में भी बैठने को जगह नहीं मिल रही थी। यही हाल बसों का भी रहा। ग्रामीण क्षेत्रों व अन्य जनपदों से आने और जाने वाली बसों में भी भारी भीड़ देखने को मिली।