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Lalitpur News: बच्चों के जीवन को प्रकाशमान बनाने वाले सच्चे पथप्रदर्शक हैं शिक्षक

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ललितपुर। बच्चों के जीवन को प्रकाशमान बनाने वाले सच्चे पथप्रदर्शक शिक्षक हैं। जनपद में ऐसे पथ प्रदर्शक तीन शिक्षकों को राष्ट्रपति पुरस्कार और 10 शिक्षकों को राज्य अध्यापक पुरस्कार से सम्मानित किया जा चुका है। इन शिक्षकों ने शिक्षा के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। उन्होंने विद्यालयों को अग्रणी बनाने में अहम भूमिका निभाई है। इस साल पांच सितंबर को शिक्षक दिवस पर लखनऊ में आयोजित समारोह में प्राथमिक विद्यालय चौकी बस स्टैंड बिरधा की प्रधानाध्यापिका प्रीति गुप्ता को राज्य अध्यापक पुरस्कार से सम्मानित किया जाएगा।
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जनपद में राष्ट्रपति पुरस्कार पाने वालों में प्राथमिक उच्च विद्यालय मिर्चवारा के तत्कालीन प्रधानाध्यापक भूपनाराणन निरंजन, प्राथमिक विद्यालय महरौनी के तत्कालीन शिक्षक भगवत सिंह और प्राथमिक विद्यालय थनवारा के तत्कालीन प्रधानाध्यापक बालकृष्ण नायक शामिल हैं। इन शिक्षकों के अथक प्रयासों और समर्पण को मान्यता मिली है। उन्होंने छात्रों के भविष्य को आकार देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उनके नवाचार और शिक्षण पद्धतियों ने शिक्षा की गुणवत्ता बढ़ाई है। इन शिक्षकों ने छात्रों के समग्र विकास में भी योगदान दिया है।
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शिक्षा के क्षेत्र में काफी बदलाव आया है,अब परिषदीय विद्यालयों को आधुनिक शिक्षा से जोड़ते हुए बच्चों को कंप्यूटर की जानकारी भी दी जा रही है। कान्वेंट स्कूलों की तर्ज परिषदीय विद्यालयों को तैयार किया गया है। हम अपेक्षा करते हैं कि वर्तमान के शिक्षक भी बच्चों को बेहतर शिक्षा दें, ताकि वह देश दुनियां में भारत का नाम रोशन कर सकें।-बालकृष्ण नायक, (2005 में राष्ट्रपति पुरस्कार से सम्मानित)
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अध्यापक बच्चों के प्रति सदैव समर्पित रहते हैं। जहां बच्चों के हितों की बात आती है, शिक्षक समर्पित रहते हैं। हमारी प्राथमिकता रहती है कि बच्चों को बेहतर शिक्षा दें, ताकि वह देश का नाम रोशन कर सकें।-विनय ताम्रकार,इंचार्ज प्रधानाध्यापक पूर्व माध्यमिक विद्यालय सिमरधा। (राज्य अध्यापक पुरुस्कार से सम्मानित)
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शिक्षक का स्थान केवल कक्षा और पुस्तकों तक सीमित नहीं होता है। वह विद्यार्थियों के जीवन में मार्गदर्शक, प्रेरणास्त्रोत और विश्वास की वह मजबूत नींव होता है, जो उन्हें कठिन परिस्थितियों में भी आगे बढ़ने का साहस देती है।-रिचा अग्रवाल, एआरपी,इंग्लिस मीडियम प्राइमरी स्कूल नंदनवारा। (राज्य अध्यापक पुरुस्कार से सम्मानित)
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किताबें ज्ञान देती हैं। लेकिन शिक्षक उस ज्ञान को जीवन जीने की कला सिखाते हैं। शिक्षक से मिले मार्गदर्शन से बच्चे नये भारत के निर्माण से आगे बढ़ रहे हैं। हमारी कोशिश है कि शिक्षक बच्चों को अच्छी से अच्छी शिक्षा दें।-सचिन निरंजन,इंचार्ज प्रधानाध्यापक प्राथमिक विद्यालय टेनगा। (राज्य अध्यापक पुरुस्कार से सम्मानित)
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आज के युग में बच्चे नवीन तकनीक के साथ आगे बढ़ रहे हैं। विद्यालयों को सरकार ने आधुनिक तरीके से तैयार करवाया है। स्कूलों में एलईडी के माध्यम से बच्चाें को पढ़ाया जाता है। आधुनिक युग में बच्चे शिक्षकों से पहले से बेहतर शिक्षा निरंतर आगे बढ़ रहे हैं।-ह्देश गोस्वामी,सहायक अध्यापक, उच्च प्राथमिक विद्यालय नैनवारा। (राज्य अध्यापक पुरुस्कार से सम्मानित)
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एक शिक्षक ही देश के बच्चों का भविष्य निर्माता होता है। आज शिक्षक अपनी पूरी मेहनत एवं लगन से काम कर बच्चों को अच्छी तालीम देकर उनका भविष्य संवार रहे हैं। उनके इन्ही कार्यों से वह राज्य पुरस्कार से सम्मानित हो रहे हैं।-वेद प्रकाश श्रीवास्तव,सेवानिवृत्त शिक्षक उच्च प्राथमिक विद्यालय मड़ावरा। (राज्य अध्यापक पुरुस्कार से सम्मानित)
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राज्य अध्यापक पुरस्कार पाने वाले शिक्षक
रामसहाय रावत,आदित्य नारायण तिवारी,वेद प्रकाश श्रीवास्तव,कृष्णमुरारी उपाध्याय,रिचा अग्रवाल,हृदेश गोस्वामी,नीलम जैन,दीपा सिंधी,विनय ताम्रकार,सचिन निरंजन।
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