ललितपुर। श्री शांति निकेतन इंटर कालेज महरौनी में शिक्षक भर्ती प्रक्रिया नियम संगत तरीके से नहीं अपनाई गई है। इसकी प्रमुख वजह कालेज को राज्य से अल्पसंख्यक श्रेणी का दर्जा नहीं मिला है, ऐसे में शिक्षक भर्ती प्रक्रिया को कैसे वैध माना जा सकता है?यह बात पत्रकारों से बातचीत के दौरान शिक्षक विधायक सुरेश त्रिपाठी ने कही।
उन्होंने आरोप लगाते हुए कहा कि श्री शांति निकेतन इंटर कालेज महरौनी में शिक्षकों का उत्पीड़न हो रहा है। इस कालेज को केंद्र ने अल्पसंख्यक का दर्जा दिया है,
लेकिन राज्य ने इसे नहीं माना है। इसके बाद भी कालेज ने मनमाने तरीके से शिक्षक भर्ती की प्रक्रिया अपनाई है। इससे संबंधित प्रश्न को विधान परिषद के आगामी अधिवेशन में उठाया जाएगा।
राजकीय कालेजों में प्रधानाचार्यों और प्रवक्ताओं की कमी के जवाब में उन्होंने कहा कि इस मामले में सरकार को कठघरे में खड़ा करने की कोशिश की जाएगी। कालेजों में अध्यापकों के बिना अच्छी शिक्षा की उम्मीद करना गलत है। वित्त विहीन शिक्षकों को मानदेय देने के सवाल के जवाब में कहा कि कालेजों की ओर से भेजी गई सीडी में मानकों का ध्यान नहीं रखा गया है।
विभिन्न कालेजों ने आवश्यकता से अधिक शिक्षकों की संख्या भेज दी है, ऐसे में सरकार ने इसका परीक्षण कराने का निर्णय लिया है। संस्कृत विद्यालयों में शिक्षकों की कमी पर उन्होंने कहा कि प्रदेश के अधिकांश संस्कृत विद्यालयों में शिक्षकों की कमी है। कई बार संस्कृत अध्यापकों की भर्ती प्रक्रिया शुरू की गई और फिर उसे रोका गया।इससे सरकार की नीयत पर संदेह होता है।
उन्होंने संस्कृत अध्यापकों की भर्ती शुरू करने पर जोर दिया। इस मौके पर प्रतिनिधि प्रताप सिंह परिहार, श्रीराम नामदेव आदि उपस्थित रहे।
उधर, जिला विद्यालय निरीक्षक श्याम प्रकाश यादव का कहना है कि संस्कृत विद्यालयों में रिक्त शिक्षकों की कमी का ब्योरा तलब किया गया है। उन्होंने शीघ्र ही शिक्षक भर्ती होने की उम्मीद जताई।