महरौनी। महरौनी विधान सभा में वैसे तो त्रिकोणीय मुकाबला माना जा रहा है, लेकिन यह तो मतगणना के दिन ही तय हो सकेगा कि किसका भाग्य साथ देता है और किसका कौन सा नंबर लगता है। समर्थकों द्वारा अपने अपने प्रत्याशियों के जीत के दावे किए जा रहे हैं और गली मोहल्लों में चौपाल लगाकर सिर्फ चुनावी गणित का आंकलन करने में लगे हुए हैं। जहां भी चार लोग इकट्ठा होते ंहै वहीं चुनावी चर्चा सुनने को मिल रही है।
महरौनी विधानसभा क्षेत्र के लिए बीस फरवरी को मतदान हुआ था और अभी तक के सभी चरणों में महरौनी विधानसभा का वोटिंग प्रतिशत 74 प्रतिशत सबसे अधिक रहा है। मतदान होते ही लोग अपनी अपनी पार्टी के प्रत्याशी की जीत के दावे करने लगे और जातिगत एवं प्रत्याशियों के स्वभाव और छवि के आधार पर आंकड़ा बैठाने लगे। वहीं कुछ प्रत्याशी तो मतदान होने के बाद उसी रात में अपने घर प्रस्थान कर गए थे।
महरौनी विधान सभा में जिन प्रत्याशियों ने चुनाव लड़ा है, उसमें कोई भी प्रत्याशी महरौनी का मूल निवासी नहीं है और न ही महरौनी में स्थायी रूप से रह रहा है। ऐसे में पार्टी कार्यकर्ता ही अपने प्रत्याशी के चहेते साबित होने के लिये अपने अपने नेता की जीत का दावा करते नजर आ रहे हैं। कई लोग तो बाकायदा बूथ और गांव वार चार्ट बनाए हुए दूसरों को दिखाते घूम रहे हैं और अपने अपने नेताओं से मिलने के लिए जिला मुख्यालय उनके निवास पर डटे रहते हैं। अधिकांश लोग सुबह से ही अपने नेता की जीत की उम्मीद लेकर अपने नेता के यहां पहुंच कर बड़ी बड़ी बातें कर रहे हैं और अपने को नेताजी का खास साबित करने की कोशिश में लगे हैं। जहां भी लोग एकत्रित होते हैं वहां सिर्फ एक ही चर्चा होती है क्यों भाई कौन चुनाव जीत रहा है, किसकी सरकार बन रही है। सभी को दस मार्च आने का बेसब्री से से इंतजार है।