ललितपुर। सूखे की विभीषका झेल रहे जिले में पेयजल संकट के आसार मंडराने लगे हैं। बांसी, बार और बालाबेहट में स्थिति भयावह होने लगी है। यदि इस ओर ध्यान नहीं दिया गया तो स्थिति और खराब हो जाएगी।
लगातार दो साल से पानी नहीं बरसने के कारण जिले में स्थितियां ठीक नहीं हैं। इस बार तो बहुत कम पानी बरसा है। ऐसे में जमीन का जलस्तर काफी नीचे चला गया है। साथ ही जो नदिया साल भर पानी के साथ बहती थीं, उन नदियों में भी पानी का संकट गहरा गया है। कस्बा बांसी की आबादी लगभग 10 हजार है। यहां पर पेेयजल आपूर्ति के लिए पहले ललितपुर स्थित गोविंद सागर बांध से पाइप लाइन के माध्यम से पानी पहुंचाया जाता था
लेकिन बाद में स्थानीय स्तर पर शहजाद नदी से जलापूर्ति की जाने लगी, लेकिन इस बार नदी में पानी नहीं है, जिससे जलनिगम कस्बावासियों को पानी पहुंचाने में नाकाम साबित हो रहा है। हालांकि, कस्बा में सौ हैंडपंप लगे हैं। लेकिन, इनमें से एक दर्जन से अधिक हैंडपंप खराब होने के कारण स्थिति बिगड़ गई है।
अब हालात यह हैं कि कस्बा में पानी आपूर्ति पांच या दस मिनट के लिए होती है। इससे पाइप लाइन के आखिरी छोर पर रहने वाले लोगों को एक सप्ताह से पानी उपलब्ध नहीं हो पा रहा है। हैंडपंपों की स्थिति भी ठीक नहीं है। ज्यादातर हैंडपंप का जलस्तर गहराई में चला गया है, जिससे उनमें बहुत कम पानी आ रहा है। जिन हैंडपंपों में पानी आ रहा है, वहां पर लंबी कतारें लग रही हैं। लोगों को एक-एक बाल्टी पानी के लिए मशक्कत करनी पड़ रही है।
कमोबेश यही स्थिति कस्बा बार और आसपास के गांवों की है। पानी नहीं बरसने के कारण कस्बा बार का तालाब नहीं भर सका है। इस तालाब से आसपास के 21 गांवों को पेयजल आपूर्ति दी जाती है, लेकिन तालाब में पानी नहीं होने के कारण यह आपूर्ति प्रभावित हो रही है। इससे न केवल लोगों को पेयजल संकट का सामना करना पड़ता है, बल्कि मूक जानवर भी पानी के लिए परेशान हैं। जो स्थितियां सर्दी के मौसम में बन गई हैं, उससे गर्मियों में आने वाले पेयजल संकट का अंदाजा लगाया जा सकता है।
उधर, बालाबेहट क्षेत्र में भी पानी का संकट गहरा गया है। इस क्षेत्र में जमीनी स्तर पर पानी बहुत गहराई में पाया जाता है, जिससे पानी नहीं बरसने के कारण जलस्तर और नीचे चला जाता है तथा हैंडपंप जवाब दे जाते हैं। इस क्षेत्र में पानी के संरक्षण के लिए भी कोई कारगर उपाय नहीं किए गए हैं,
जिससे ग्रामीणों को परेशानी का सामना करना पड़ता है। अभी सर्दी का मौसम चल रहा है और पानी का संकट गहराने लगा है, जिससे आने वाले गर्मी के मौसम में स्थिति और बिगडनी तय है।
जामनी नदी के पानी की निकासी पर रोक
मध्य प्रदेश के बार्डर से निकली जामनी नदी के पानी की निकासी पर जिला प्रशासन ने रोक लगा दी है। दरअसल, मप्र के टीकमगढ़ शहर में जामनी नदी पर बने बरीघाट स्टापडेम के माध्यम से जलापूर्ति की जाती है। बरसात कम होने के कारण स्टापडैम में पानी का बहाव लगभग खत्म हो गया है। वहीं, बरसात कम होने के कारण आसपास के ललितपुर जिले के किसान पंपसेट लगाकर पानी निकाल रहे थे,
जिस पर ध्यान देते हुए टीकमगढ़ के जिला प्रशासन ने ललितपुर के जिला प्रशासन से पानी निकासी पर रोक लगाने को कहा था। इसे गंभीरता से लेते हुए जिला प्रशासन ने सिंचाई विभाग को तटीय क्षेत्र के किसानों को पानी की अनाधिकृत निकासी पर रोक लगाने के निर्देश दे दिए हैं।
इनका कहना है,
नगर के बाहरी इलाकों से बांसी के लिए पाइप लाइन डाली जा रही है। हाइवे पुल पर कुछ काम बाकी होने के कारण इसमें विलंब हो रहा है। लेकिन, इसे जल्द से जल्द पूरा करने के निर्देश ठेकेदार को दिए गए हैं।
- इजीं. आरएस चौधरी
अधिशासी अभियंता जल संस्थान