ललितपुर। सुरईघाट कालोनी में युवक की मौत के मामले में पुलिस पर सुविधा शुल्क के लिए प्रताड़ना क ा आरोप लगाया गया है। इस तरह का यह जिले में पहला मामला नहीं है, पहले भी खाकी पर प्रताड़ना के चलते आत्महत्या और हत्या के भी आरोप लग चुके हैं। इन मामलों में भी आरोपी दरोगा या पुलिस कर्मियों के खिलाफ निलंबन या लाइनहाजिर और मुकदमा दर्ज करने तक की कार्रवाई की गई।
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-केस नंबर एक-
दो वर्ष पूर्व कस्बा नाराहट निवासी एक ग्रामीण देवेंद्र कुशवाहा की कोतवाली में पुलिस की पिटाई से मौत होने का आरोप लगाया गया था, इसमें सदर चौकी प्रभारी एवं सिपाही को लाइन हाजिर किया गया था। बाद में यह मामला विधानसभा में भी उठाया गया था।
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केस नंबर दो-
एक वर्ष पहले सदर चौकी क्षेत्र के मोहल्ला छत्रसालपुरा निवासी शिवम कौशल (23) पर एक लड़की ने छेड़छाड़ का आरोप लगाते हुए शिकायत की थी । यह मामला भी पुलिस तक पहुंचने और शिवम को पूछताछ के लिए संपर्क करने पर उसने अपनी कनपटी पर पिस्टल से गोली मारकर आत्महत्या कर ली थी। इस मामले में भी शिवम के परिजनों ने पुलिस पर इस मामले में एक लाख रुपये की मांग के आरोप लगाए थे, इसमें भी सिपाही पर लाइन हाजिर की कार्रवाई की गई थी।
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केस नंबर तीन-
कोतवाली क्षेत्र अंतर्गत ग्राम जिजयावन में तीन वर्ष पहले ग्राम जिजयावन निवासी वृद्घ सुरेंद्र सिंह यादव (60) ने घर से कुछ दूर स्थित एक खेत में आम के पेड़ पर रस्सी से लटककर आत्महत्या कर ली थी। इसमें उसके परिजनों ने आरोप लगाया था कि एक पूर्व के मुकदमे में दरोगा द्वारा सुरेंद्र सिंह को आरोपियों पर आगे कार्रवाई नहीं करने को धमकाया जा रहा था। लेकिन, जब वृद्घ नहीं माना तो दरोगा ने उसे सरेआम कॉलर पकड़कर गाली गलौज करने करते हुए थप्पड़ मारते हुए जमीन पर गिरा दिया था, इसके बाद पुलिस की प्रताड़ना से तंग आकर उसने क्षुब्ध होकर फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली थी। इसमें भी बाद में पुलिस अधीक्षक ने उक्त दरोगा को निलंबित कर दिया था।