परिवहन विभाग के अफसरों ने छात्रों को स्कूल लाने व ले जाने के मामले में पल्ला झाड़ लिया है। स्कूल प्रबंधक/ प्रधानाचार्य ही मानक पूरा करने वाले वाहनों का प्रयोग करें। इसका खुलासा आईजीआरएस पर की गई शिकायत के निस्तारण से हुआ है। इसमें एटीआरटीओ ने टैक्सी/ऑटो स्कूल वाहनों को मानक पूरा नहीं करने वाले वाहन बताया है। इससे टैक्सी चालकों में खलबली मच गई है।
शहर में संचालित निजी स्कूलों के पास छात्रों को लाने व ले जाने के लिए पर्याप्त वाहन नहीं हैं। इस स्थिति में लगभग सभी स्कूलों में टैक्सी/आटो लगी हुई है, जिनसे छात्र/छात्राएं स्कूल पहुंच रहे हैं। यातायात पुलिस ने चालकों की मनमानी पर अंकुश लगाने के लिए स्कूल टैक्सी/आटों में बच्चों की संख्या निर्धारित करते हुए आठ कर दी है। पहले चालक बारह व पंद्रह तक बच्चों को टैक्सी में बैठा लेते थे। पुलिस प्रशासन की सख्ती को देख चालकों ने टैक्सी मूं बच्चों की संख्या कम कर दी है। इसकी जगह मासिक किराया बढ़ा दिया है। गत शैक्षिक सत्र में एसडीएस कान्वेंट स्कूल, केंद्रीय विद्यालय, संस्कार वैली स्कूल का मासिक किराया दोगुना कर दिया गया है। जिससे अभिभावकों में असंतोष देखा जा रहा है। पिछले दिनों राजपूत कालोनी निवासी मनोज सक्सेना व गांधीनगर निवासी सौरभ ने मुख्यमंत्री पोर्टल पर चालकों की मनमानी की शिकायत की थी।
जिसके निस्तारण की जिम्मेदारी एआरटीओ सतेंद्र कुमार को दी गई। उन्होंने दोनों ही शिकायतों का निस्तारण कर दिया है। उन्होंने डीएम को दी आख्या में बताया कि टैक्सी चालक स्कूलों के बच्चे लाने व ले जाने के लिए अधिकृत नहीं हैं क्योंकि वे स्कूल वाहन के मानकों को पूरा नहीं करते हैं। इस संबंध में स्कूल के प्रधानाचार्यो व प्रबंधकों को पूर्व में अवगत कराया जा चुका है। इसमें उन्हें मानक पूरा करने वाले वाहनों का प्रयोग छात्र/छात्राओं को लाने व ले जाने में प्रयोग करने के लिए कहा गया है। इस जवाब से शिकायतकर्ता संतुष्ट नहीं हैं। उनका कहना है कि इस जवाब से उनकी समस्या का समाधान नहीं हो सका है।
यदि टैक्सी स्कूल वाहन का मानक पूरा नहीं करते हैं तो उनके खिलाफ कार्रवाई अमल में लाई जानी चाहिए। यदि इसके बाद भी टैक्सी छात्रों का लाने व ले जाने का काम कर रही हैं तो इसमें विभागीय अधिकारियों की संलिप्ता से इंकार नहीं किया जा सकता है। उधर, टैक्सी चालक एटीआरटीओ के जवाब से स्तब्ध हैं। आने वाले दिनों में इसको लेकर टैक्सी चालक बैठक कर कोई रणनीति बना सकते हैं। हालांकि, पूरा मामला अभिभावक एवं टैक्सी चालकों में फंसकर रह गया है। वहीं, अधिकारियों ने इससे खुद को अलग कर लिया है। जिससे मामला उलझने के आसार हैं।