विद्युत विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों की उदासीनता कभी गंभीर हादसे का कारण बन सकता है। गांव में जगह-जगह बिजली की केबिल जमीन से कुछ ऊपर झूल रही है। इसके कारण लोगों को अपनी बच्चों की सुरक्षा को लेकर हर समय संशय बना रहता है।
राजमार्ग पर बसे इस गांव की बुनियादी आवश्यकता पर किसी भी विभागीय अधिकारी का ध्यान नहीं है। वहीं, जनप्रतिनिधियों को चुनाव के समय गांव की समस्या और लोगों के हित ध्यान में आते है। चुनाव होने के बाद अधिकारी और जनप्रतिनिधि जनता के प्रति संवेदनहीन हो जाते हैं। इस समय गांव में अधिकांश घरों में विद्युत संयोजन है। इसके लिए विद्युत खंभों पर पहले तार डाले गए, परंतु कुछ वर्ष पहले यहां तारों को हटा कर बंद केबल डाल दी गई। यह केबिल इस समय सही रखरखाव न होने के कारण जगह-जगह जमीन से कुछ ही ऊंचाई पर है। कही-कही तो केबिल इतनी नीची है कि रास्ते से गुजरने वाले राहगीरों को सुरक्षित निकलने के लिए सिर झुकाना पड़ता है। धनीराम झा और पूर्व मावि के पास तो लगी केबिल दिन प्रति दिन नीची होती जा रही है। लोगों का कहना है कि यदि विभागीय अधिकारियों ने इस ओर ध्यान नहीं दिया तो आने वाले समय में केबल जमीन पर आ जाएगी। इससे लोगों के मन में काफी भय व्याप्त है। ग्रामीणों ने बताया कि उन्होंने इन केबलों को सही करने के लिए कई बार विभागीय अधिकारियों और कर्मचारियों को अवगत कराया परन्तु किसी ने इस ओर ध्यान नहीं दिया। वहीं, इस संबंध में विद्युत विभाग के उपखंड अधिकारी महेश चंद्र विश्वकर्मा से उनका पक्ष लिया तो उनका कहना था कि अभी तक किसी ने इस संबंध में बताया नहीं। पूरे कार्य का प्रांकलन बना कर इस कार्य को प्राथमिकता के आधार पर कराया जाएगा।