ललितपुर। श्रीसिद्धपीठ चंडी मंदिर धाम पर सवा पांच करोड़ पार्थिव शिवलिंग का निर्माण और रुद्रमहायज्ञ हुआ। इसमें बुधवार को श्रद्धालुओं ने 15 लाख पार्थिव शिवलिंग का निर्माण किया। रुद्रमहायज्ञ और पीठ पूजन किया गया।
चंडीपीठाधीश्वराचार्य स्वामी चंद्रेश्वर गिरि ने कहा कि महापुराणों में शिवमहापुराण को सर्वोपरि बताया गया है। यह पुराण ही सभी महापुराणों का सार है। इस पुराण का चेतन पाठ करने से सभी पापों का अंत हो जाता है। मन शिवमय होकर शिवभक्ति और शिव लीला में लीन हो जाता है। हम सभी यह तो जानते हैं कि शिवजी को संहारकर्ता कहा जाता है। परंतु संहारकर्ता के साथ शिवजी भोलेनाथ भी हैं। इनका कल्याणकारी स्वरूप, जल्द प्रसन्न होने वाला रूप इन्हें सर्वाेपरि बनाता है। पुराण शिव आराधना और पूजा का विस्तृत वर्णन करता है। महाशिव का गुणगान ही इस पुराण का अमृत सार है। महान शिव, भोले शिव, दयालु और कल्याणकारी शंकर और बुराई के लिए रुद्र शिव से हम इस महापुराण से साक्षात्कार कर सकते हैं। भगवान भोलेनाथ की महाआरती अध्यक्ष जिला पंचायत कैलाश निरंजन, पूर्व जिलाध्यक्ष जगदीश सिंह लोधी, अधिशाषी अधिकारी दिनेश लाल, मदन शर्मा, राजीव बबेले, राजकुमार नायक, सुनील शर्मा, कमलेश गोस्वामी, अनूप मोदी, अशोक भार्गव आदि उपस्थित रहे।