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जीवन जीने की कला सिखाती है श्रीराम कथा

Sun, 28 Feb 2016 12:40 AM IST
ब्यूराे/अमर उजाला
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ललितपुर। श्री तुवन मंदिर प्रांगण में चल रही श्रीराम कथा के पांचवें दिन पीठाधीश्वर स्वामी राजेंद्र दास देवाचार्य महाराज ने कहा कि श्रीराम कथा जीवन जीने की कला सिखाने वाली कला है। श्रीरामचरित मानस छह शास्त्रों व 18 पुराणों का रस है। वेद, श्रुति एवं पुराणों के मान्य सूत्र, जो व्यक्ति और समाज के जीवन के लिए आवश्यक हैं, वह सभी इसमें समाहित हैं।
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शनिवार को श्रीराम कथा के शुभारंभ में मुख्य यजमान ऊषा जायसवाल और नगर पालिका अध्यक्ष सुभाष जायसवाल ने श्री रामायण की पूजा व आरती की। इसके बाद श्रीराम कथा के दौरान देवाचार्य महाराज ने कहा कि कथा श्रवण मनन से इन गुणों को जीवन में उतारा जाए, तभी भौतिकता वादी जीवन को भुलाकर अध्यात्मिक उन्नति की ओर अग्रसर होंगे।

उन्होंने कहा कि व्यक्ति के जीवन में उन्नति के लिए दो बातें आवश्यक है, एक उत्तम कुल में जन्म और दूसरा श्रेष्ठ गुरु की संगति। उत्तम कुल में जन्म लेने से व्यक्ति संस्कार संपन्न हो जाता है और श्रेष्ठ गुरु का मार्गदर्शन जीवन में सर्वांगीण उन्नति प्रदान करता है।
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कार्यक्रम का संचालन दीनबंधु दास महाराज ने किया। इस दौरान अनंतराम तिवारी, छक्कीलाल साहू, रामेश्वर सड़ैया, छोटे साहू, देवेंद्र चतुर्वेदी, निखिल तिवारी, विनोद पटेल, रामस्वरूप साहू, नरेश शेखावत, रमेश पाठक, संजय तिवारी, रामगोपाल साहू, दुर्गा प्रसाद पाठक, रामनिवास शर्मा, मुकेश शर्मा और राकेश भदौरिया ने श्रीरामायण की आरती की। कार्यक्रम के दौरान मुख्य रूप से डा. ओमप्रकाश शास्त्री, भगवत नारायण वाजपेयी, धर्मेंद्र रावत, सोनू पाठक, रमाकांत तिवारी, चंद्र विनोद मिश्रा, सीताराम सोनी, दिनेश गोस्वामी, राव राजा बुंदेला, जगदीश मंदिर समिति  के प्रतिनिधि, श्रीतुवन मंदिर भंडारा समिति के सदस्य आदि उपस्थित रहे।
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