ललितपुर। पर्यटन की दृष्टि से महत्वपूर्ण राजघाट बांध परियोजना का करीब 25 वर्षो बाद करीब पांच करोड़ रुपये की लागत से मरम्मत काम कराया गया। इसमें बांध के डाउन स्ट्रीम के चोक चल रहे सीपेज ड्रेन, लीकेज, रेन कट और स्पिल वे का रंग-रोगन सहित निरीक्षण भवन की मरम्मत कराई गई।
मध्य प्रदेश व उत्तर प्रदेश में बहने वाली बेतवा नदी पर राजघाट बांध की कार्ययोजना 1972 में बनाई गई थी। वर्ष 1999 में राजघाट बांध बनकर तैयार हो गया था। कुछ माह पूर्व शासन ने बांधों की सुरक्षा के संबंध में परीक्षण कराया था। इसमें राजघाट बांध में सीपेज ड्रेन में चोक, लीकेज, स्पिल वे, रेन कट सहित अन्य कमियों को दुरुस्त कराने की जरूरत बताई गई थी। सीपेज ड्रेन से पानी का प्राकृतिक प्रवाह अवरुद्ध हो गया था। इस कारण जगह-जगह पानी भर रहा था। बांध के ढांचे को नुकसान होने की आशंका थी। बांध की सुरक्षा को देखते हुए सिंचाई विभाग ने इन कामों सहित अन्य काम कराने के लिए करीब पांच करोड़ रुपये की कार्ययोजना तैयार की थी। कार्ययोजना को स्वीकृति मिलने के बाद कार्यदायी संस्था ने बांध के सीपेज ड्रेन को सही किया। लीकेज को सुधारा, रेन कट सुधार कार्य किए।
बांध से बिजली का होता है उत्पादन
राजघाट बांध परियोजना में बिजली उत्पादन किया जाता है। इसके लिए तीन टर्बाइन स्थापित हैं। इनके जरिए 45 मेगावाट बिजली का उत्पादन किया जाता है।
राजघाट बांध यूपी-एमपी की संयुक्त परियोजना है। इसमें दोनों ही प्रदेशों के लोगों को इससे लाभान्वित किया जाता है। बांध निर्माण के बाद इसमें कोई सुधार कार्य नहीं हुए थे। इससे सीपेज ड्रेन, लीकेज सहित अन्य कमियां सामने आई थीं। इनको ठीक कराकर दुरुस्त करा दिया गया है। - इंजी. भागीरथ बरुआ, अधिशासी अभियंता सिंचाई निर्माण खंड प्रथम