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अब सह समन्वयक करेंगे स्कूलों का निरीक्षण

Thu, 07 Jan 2016 01:14 AM IST
ब्यूरो
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ललितपुर। ब्लाक संसाधन केंद्रों में कार्यरत सह समन्वयकों को अब विद्यालयों के निरीक्षण का अधिकार प्रदान कर दिया गया है। शासन ने निरीक्षण का अधिकार देते हुए सभी सह समन्वयकों को हर महीने 25 विद्यालयों के निरीक्षण का लक्ष्य भी निर्धारित कर दिया है। इससे विद्यालयों के संचालन की स्थिति में सुधार होने की उम्मीद बंध गई है।
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परिषदीय विद्यालयों की शिक्षा में गुणात्मक सुधार लाने के उद्देश्य से प्रत्येक ब्लाक में संसाधन केंद्र स्थापित किए गए हैं। इनमें बीआरसी एवं पांच विषय के सह समन्वयकों की तैनाती की गई है। दोनों को ही शैक्षिक सपोर्ट की जिम्मेदारी सौंपी गई है। यही नहीं, बीआरसी और एबीआरसी (सह समन्वयक) ने दो-दो विद्यालय मॉडल बनाने के लिए गोद ले रखे हैं। इसके बाद भी जूनियर स्तर की शिक्षा में तनिक भी सुधार नहीं हुआ है। इसके मद्देनजर शासन ने नीति में बदलाव किया है।

अब सह समन्वयकों को निरीक्षण के भी अधिकार दे दिए गए हैं। शिक्षा निदेशक बेसिक दिनेश बाबू शर्मा ने बीएसए को लिखे पत्र में कहा कि सचिव बेसिक शिक्षा उत्तर प्रदेश शासन द्वारा बीआरसी के सह समन्वयक से प्रति माह 25 विद्यालयों के निरीक्षण कराए जाएं। उन्होंने विद्यालयों के निरीक्षण करने का आदेश जारी करते हुए आख्या प्राप्त करने के लिए बीएसए से कहा है।
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कौन करेगा अनुश्रवण?
सह समन्वयकों को निरीक्षण का अधिकार मिलने से अनुश्रवण का संकट खड़ा हो गया है। शिक्षकों का कहना है कि यदि सह समन्वयक विद्यालयों के निरीक्षण करेंगे तो शैक्षिक अनुश्रवण किससे द्वारा किया जाएगा। यह अभी तक स्पष्ट नहीं हो सका है।

क्या है अनुश्रवण और अनुसमर्थन
सह समन्वयकों को अभी तक विद्यालयों में अनुश्रवण व अनुसमर्थन का कार्य करना होता था। अनुश्रवण से आशय यह है कि विद्यालयों का सुधारात्मक तरीके से अवलोकन करना। अनुसमर्थन का मतलब शिक्षण कार्य में आ रही दिक्कतों का समाधान करते हुए नए तरीके बताना।
अब सह समन्वयक निरीक्षण के साथ इसे करते है या नहीं, इसको लेकर संशय बना हुआ है। खंड शिक्षा अधिकारियों के  पास भी तीनों काम हैं, इसके  बाद भी वह केवल निरीक्षण ही करते हैं। यदि सह समन्वयक भी उसी राह पर चले तो अनुश्रवण, अनुसमर्थन का काम बंद ही हो जाएगा।

डायट से समाप्त होगा संबद्धीकरण!
सह समन्वयकों को निरीक्षण का अधिकार मिलने के बाद अब उनका डायट में संबद्धीकरण नामुमकिन सा हो गया है। यदि डायट में वह संबद्ध रहे तो विद्यालयों के 25 निरीक्षण संभव नहीं हैं।
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