ललितपुर। कोरोना संक्रमण के चलते स्कूली बच्चों की पढ़ाई अब तक तो घर पर होती रही लेकिन एक सितंबर से उन्हें कक्षाओं में बैठकर पढ़ना होगा। इस संबंध में शासन की गाइड लाइन जारी होने के बाद बेसिक शिक्षा विभाग तैयारियों में जुट गया है, लेकिन अभी भी कई स्कूल ऐसे है जहां बच्चों को दिक्कत का सामना करना पड़ सकता है। इन स्कूलों में कही तो भवन खस्ताहाल हो रहे तो कहीं पर फर्नीचर की समस्या बनी हुई है। शौचालय भी मरम्मत का इंतजार कर रहे है। वहीं, टंकी में लगे नल गायब है। शुक्रवार को कुछ स्कूलों का हाल जाना तो हकीकत सामने आ गई। पेश है परिषदीय स्कूलों का हाल।
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मड़ावरा क्षेत्र की ग्राम पंचायत बड़वार में कुछ माह पहले संविलियन पूर्व माध्यमिक विद्यालय का भवन ध्वस्त हो चुका है, साथ ही प्राथमिक विद्यालय भवन की दीवारों में लंबी-लंबी दरारें पड़ने से वह भी गिरने की कगार पर है। बच्चों के लिए बनवाया गया हाथ धोने वाले स्थल पर अब पानी ही नहीं आ रहा। विद्यालयों में शौचालयों की स्थिति भी काफी दयनीय है इनकी सीटें-दरवाजे टूटे हुए हैं, जिनका उपयोग स्कूली छात्र चाहते हुए भी नहीं कर पा रहे हैं जिसके लिए उन्हें मजबूरन खुले में शौच जाना पड़ रहा है। बीते 24 अगस्त से छात्रों के लिए स्कूल खुल चुके हैं, लेकिन विद्यालय परिसर में खड़ी झाड़-झंखाड़ में जहरीले सांप-बिच्छुओं का खतरा बना हुआ है। इधर, क्षेत्र के ही मानपुरा, लिधौरा, हंसरा, गंगचारी समेत तमाम परिषदीय विद्यालय भवन एवं अतिरिक्त कक्ष जर्जर हो चुके हैं।
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महरौनी। ब्लॉक क्षेत्र के बीआरसी में स्थित प्राथमिक विद्यालय द्वितीय की हालत खस्ता है। इस भवन का निर्माण सन1972 में हुआ था,भवन में दरारें पड़ गई हैं बारिश का पानी टपकता है। इसके अलावा इसी तरह प्राथमिक विद्यालय महरौनी नंबर एक का निर्माण सन 1964 में कराया गया था। प्राथमिक विद्यालय प्राचीन कन्या महरौनी का निर्माण 1970 में कराया गया था। प्राथमिक विद्यालय पठा नंबर दो का निर्माण 1970 में कराया गया था और प्राथमिक विद्यालय शुकुलगुआं 1972 में बनाया गया था, ये सभी भवन जर्जर हो चुके है और बारिश के पानी से टपकने लगते है इन भवनों की छतें पत्थर चढ़ाकर बनाई गई थीं। ग्रामीणों की माने तो इन भवनों में बैठना बच्चों और शिक्षकों के लिए जोखिम भरा है।
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कारीटोरन। ब्लॉक बार क्षेत्र के ग्राम कारीटोरन में अंग्रेजी माध्यम स्कूल की दालान से लेकर कमरों की छत व दीवाल जर्जर हालत में है। दीवारों में जगह जगह दरार आ चुकी है, बारिश के मौसम में सीलिंग से पानी रिसने से सीलिंग में भी कहीं कहीं गिट्टी दिखने लगीं है। यह भवन 2007 -08 में बनकर तैयार हुआ था कि बच्चों को उच्च शिक्षा मिलेगी लेकिन स्कूल भवन चौदह वर्ष में ही खस्ताहाल हो गया है। स्कूल में फर्नीचर टूटा पडा़ है बाथरूम में बदबू और गंदगी है बच्चों का खाद्यान्न बाल्टी,कटी फटी बोरियों में भरा पड़ा है। एक सितंबर से कक्षा प्रारंभ होने जा रहीं हैं पर अभी तक कोई तैयारी नहीं है। प्रधानाचार्य आरिफ खान ने बताया कि प्रधान ने स्कूल की मरम्मत शुरू करा दी है।
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जिले में खस्ताहाल स्कूलों के भवन को चिह्नित कर लिया गया है। इन स्कूलों का ग्राम पंचायतों के माध्यम से कायाकल्प कराया जा रहा है। -राम प्रवेश, बीएसए
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बड़वार का ध्वस्त विद्यालय एवं दीवारों में पड़ी दरारें- फोटो : LALITPUR
परिसर में खड़ी झाड़ियां- फोटो : LALITPUR
बगैर टोंटी का हैंडवाश स्थल- फोटो : LALITPUR