कड़ेसरा गांव में बांस की डलिया, सूपा व पंखों का निर्माण करती हैं महिलाएं
संवाद न्यूज एजेंसी
ललितपुर। ग्राम कड़ेसरा कलां की सहरिया महिलाओं ने बांस की डलिया व अन्य सामग्री बनाने का कार्य समूह के माध्यम से दिया, जिसके लिए एनआरएलएम (राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन) ने उन्हें बाजार उपलब्ध कराया। जिसका परिणाम यह हुआ है कि उन्होंने अपनी आय में बढ़ोत्तरी की है।
सहरिया आदिवासी जाति की महिलाओं को अनपढ़ एवं कमजोर माना जाता रहा है, लेकिन ग्राम कड़ेसरा की आदिवासी महिलाओं ने इस अवधारणा को बदल दिया है। उन्होंने संघर्ष व एकजुटता का परिचय दिया है। जिससे वह साल में 60 से 70 हजार रुपये कमा रही हैं। इन महिलाओं ने 2018 में जय मां दुर्गा समूह का गठन किया गया। इसमें उन्होंने गांव से बांस खरीद कर उसकी डलिया, सूपा व पंखा निर्माण का व्यवसाय प्रारंभ किया।
इस व्यवसाय से इस समूह की प्रत्येक महिलाओं के प्रतिमाह की आमदनी पांच से छह हजार रुपये से अधिक हो गई है। समूह की महिलाओं ने चक्रीय निधि के रूप में पंद्रह हजार और सामुदायिक निवेश निधि के रूप में एक लाख दस हजार रुपये दिया गया। यह धनराशि इन महिलाओं के लिए कारगर सिद्ध हुई है। अगर इन्हें इनकी व्यापक बिक्री के लिए व्यापक पटल मिल जाए, तो यह अपनी आमदनी को दोगुना कर सकती है।
छह साल से अधिक समय हो गए हैं, इस कारोबार को कर रहे हैं। समूह बनाने के बाद हमें आर्थिक सहायता मिली है। जिससे हमने अपने कार्य को बढ़ाया है।
उर्मिला ।
समूह की महिलाएं पहले बांस की डलिया बना रही थीं, अब सरकारी की मदद मिलने के बाद सूपा व पंखा का निर्माण भी करने लगी हैं।
ऊषा।
अभी जितना बिक जाता है, उनका माल तैयार करते हैं। अगर उचित पटल विक्रय के लिए मिल जाए, तो हम अपनी आमदनी को बढ़ा सकते हैं।
रामलली।