सिलावन (ललितपुर)। डा. राममनोहर लोहिया समग्र ग्रामों में पानी की तरह पैसा बहाने के बाद भी हालात काफी दयनीय हैं। कई गांवों के संतृप्त हो जाने के बाद भी वहां की गलियां कच्ची हैं। विद्यालय तो हैं, लेकिन वहां तक पहुंचने के रास्ते उबड़- खाबड़ हैं, कहीं उपस्वास्थ्य केंद्र बदहाल है तो कहीं पंचायत भवन। किसी का शौचालय अधूरा है तो कोई पात्र होने के बाद भी लाभार्थीपरक योजनाओं से वंचित है। इसकी बानगी हैं विकासखंड महरौनी के अंतर्गत समग्र ग्राम कुरौरा और दिगवार।
विकास की आधारभूत सुविधाओं से वंचित राजस्व ग्रामों को विकास की मुख्यधारा से जोड़ने के उद्देश्य से प्रदेश सरकार ने वर्ष 2012 में डा. राममनोहर लोहिया समग्र विकास योजना लागू की।
सरकार ने लोहिया समग्र गांवों में विकास की गंगा बहाने के लिए इक्कीस विभागों को ग्रामों में संपर्क मार्ग, विद्युतीकरण, आंतरिक नालियों व गलियों का निर्माण, स्वच्छ शौचालयों का निर्माण, आवासहीनों को आवास उपलब्ध कराने, स्वास्थ्य उपकेंद्र, आंगनबाड़ी केंद्र की स्थापना के अलावा मार्ग प्रकाश व्यवस्था, नि:शुल्क बोरिंग, कुम्हारी कला हेतु भूमि का आवंटन, विभिन्न छात्रवृत्तियां उपलब्ध कराने, लाभार्थीपरक योजनाओं आदि को उपलब्ध कराने की जिम्मेदारी सौंपी। वित्तीय वर्ष 2012-13 में विकास खंड महरौनी अंतर्गत कुरौरा गांव को योजना में शामिल किया गया। समय गुजरता गया और आशानुरूप विकास कार्य नहीं कराए गए। यहां परम कुशवाहा के मकान से पंचायत भवन तक 200 मीटर और पूर्व व प्राथमिक विद्यालय एवं उपस्वास्थ्य केंद्र तक जाने का 400 मीटर तक का रास्ता ऊबड़-खाबड़ और कच्चा हैं। पंचायत भवन खस्ताहाल हो गया है। उपस्वास्थ्य केंद्र का उद्घाटन होने से पूर्व की क्षतिग्रस्त हो गया हैं। बिजली के खंभे तो लगा दिए गए, लेकिन आज तक करंट नहीं दौड़ा है।
मानकुंवर पत्नी छोटे राजा का शौचालय आज तक अधूरा पड़ा हुआ है। कई बार अधिकारियों को अवगत कराया, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हो रही है। दयाराम और नन्नु राजा के घर के सामने को हैंडपंप महीनों से खराब पड़ा है। साथ ही पीने के पानी के लिए कई हैंडपंपों की आवश्यकता है, जिसे संबंधित विभाग ने आज तक नहीं कराया है। सौर उर्जा की लाइट खराब होने से ग्रामीणों को इसका लाभ भी नहीं मिल रहा है। ऐसे ही वर्ष 2014-15 इसी विकास खंड के दिगवार गांव का चयन लोहिया समग्र ग्राम योजना में किया गया था। यहां आज भी दर्जनों पात्र महिलाएं समाजवादी पेंशन का इंतजार कर रही हैं। साथ ही दर्जनों आवासहीन परिवार आवास का इंतजार कर रहे हैं। गांव में ड्रेनेज व्यवस्था को नजर अंदाज कर दिया गया। कहीं भी नाली का निर्माण नहीं कराए जाने से घरों व हैंडपंपों का गंदा पानी रास्ते में ही जमा रहता हैं। इतना ही नहीं गांव का मुख्यमार्ग हनुमान मंदिर से लेकर 450 मीटर रास्ते को कच्चा ही छोड़ दिया गया, जिसके चलते ग्रामीणों को अपने-अपने आवास तक पहुंचने में काफी परेशानी का सामना करना पड़ता है।
उप स्वास्थ केंद्र का भी निर्माण नहीं कराया गया है, जिससे मरीजों को इलाज के लिए मुख्यालय तक जाना पड़ता हैं। सच्चाई यह है कि जिस उद्देश्य के साथ योजना संचालित की गई थी, उस पर वह खरी नहीं उतरी है, जिससे ग्रामीणों में असंतोष व्याप्त है।