ललितपुर। जिले के अधिकतर राजकीय स्कूल और कालेज ‘ओवरलोड’ हो चुके हैं। इसके
पीछे प्रमुख वजह गरीबी है। अभिभावक शुल्क कम होने के कारण राजकीय कालेजों
में ही प्रवेश कराने के चक्कर में रहते हैं। इन हालातों में कालेजों को ओवर
छात्रांकन का दबाव झेलना पड़ता है।
जिले में सात राजकीय इंटर कालेज एवं
सत्रह राजकीय हाईस्कूल संचालित हैं, जिनमें वित्त विहीन विद्यालयों के
मुकाबले फीस कम होती है। जिस कारण ग्रामीण क्षेत्र के अभिभावक राजकीय
कालेजों में अपने बच्चे का प्रवेश कराना पसंद करते हैं। इन हालातों में
राजकीय कालेज ज्यादा छात्रांकन का दबाव झेल रहे हैं।
इसकी बानगी राजकीय
बालिका इंटर कालेज ललितपुर है। यहां जूनियर शाखा में चार सौ पच्चीस, कक्षा
नौ में एक हजार एक सौ सत्ताइस, कक्षा दस में एक हजार छह, कक्षा ग्यारह में
एक हजार एक सौ इकतालीस व कक्षा बारह में नौ सौ इक्यावन छात्रांकन है।
कमोवेश यही स्थिति अन्य राजकीय कालेजों की है। बीते सालों में तत्कालीन
जिलाधिकारी ने नगर में एक और जीजीआईसी खोलने की पहल की थी, लेकिन वह परवान
नहीं चढ़ सकी।
सदर विधायक ने उठाया था मामला
ललितपुर।
बीते माह सदर विधायक रमेश कुशवाहा ने ग्राम पूराकलां व बिजरौठा में राजकीय
इंटर कालेज खुलवाने के लिए विधानसभा में नियम इक्यावन के अंतर्गत प्रश्न
उठाया था। उनका कहना था कि पूराकलां व बिजरौठा की आबादी बीस हजार है। यही
नहीं, कालेज के अभाव में यहां के छात्र-छात्राओं को पच्चीस किलोमीटर की
दूरी तय कर तालबेहट में शिक्षा ग्रहण करनी पड़ती है। जिस पर शिक्षा निदेशक
माध्यमिक ने जिला विद्यालय निरीक्षक से जवाब मांगा है।