महरौनी (ललितपुर)। पहले रबी फसल में ओलावृष्टि और अतिवृष्टि इसके बाद कम बारिश और पीला मोजेक रोग से खरीफ की फसल चौपट हो जाने से किसान बुरी तरह से टूट गया है। ऐसे में वह मुआवजे को लेकर परेशान हैं। मंगलवार को किसानों ने इंदिरा चौराहे पर चक्का जाम कर दिया। करीब तीन घंटे तक जाम लगाए रहने के बाद अफसरों के आश्वासन पर जाम खोला गया।
मंगलवार को तहसील क्षेत्र के किसान सड़कों पर उतर आए। वह सुबह से बर्बाद फसल का नमूना लेकर तहसील मुख्यालय पहुंचे और मुआवजा की मांग को लेकर प्रदर्शन शुरू कर दिया। दोपहर करीब 12 बजे सैकड़ों किसानों ने इंदिरा चौराहा से होकर गुजरने वाले सभी मार्गों पर आड़े तिरछे ट्रैक्टर खड़े करके चक्का जाम कर दिया और नारेबाजी शुरू कर दी। चक्का जाम होने से यातायात व्यवस्था ठप पड़ गई और सड़कों पर वाहनों की लंबी कतारें लग गईं। सूचना पाकर कोतवाली पुलिस बल ने मौके पर जाकर मोर्चा संभाला और किसानों को समझाकर जाम खुलवाने का प्रयास किया, लेकिन किसान नहीं माने। इस पर सीओ कृष्ण स्वरूप दिवाकर पहुंचे और वह भी किसानों को समझाते रहे, लेकिन बात नहीं बनी। कड़ी धूप में प्रदर्शन करते हुए किसानों के बीच जब कोई जिम्मेदार अधिकारी और जनप्रतिनिधि नहीं पहुंचा तो किसानों का आक्रोश बढ़ गया। आखिरकार, किसानों के एक दल ने तहसील परिसर की ओर रुख किया और उपजिलाधिकारी कार्यालय के बाहर एकत्रित होकर प्रदर्शन किया। आक्रोशित किसानों ने प्रशासन के विरुद्ध काफी देर तक नारेबाजी की।
तब जाकर तहसीलदार सुशील कुमार दुबे किसानों के बीच पहुंचे और उन्हें समझाया। उन्होंने कहा कि डीएम के निर्देश पर राजस्व एवं कृषि विभाग की संयुक्त टीम गठित कर गांव-गांव जाकर फसलों की क्षति का आंकलन किया जा रहा है और शीघ्र ही इसकी रिपोर्ट शासन को भेजी जाएगी। किसानों ने कहा कि उनके गांवों में अभी तक कोई सर्वेक्षण टीम नहीं पहुंची है। जिस पर तहसीलदार ने कहा कि कल से ही संबंधित ग्रामों के लेखपाल फसलों का निरीक्षण करने उनके ग्राम पहुंचेंगे। काफी मान मनौव्वल और आश्वासन के बाद किसी तरह किसान शांत हुये और करीब तीन घंटे तक लगा रहा जाम खोल दिया।
किसानों के इस प्रदर्शन में तहसील क्षेत्र के ग्राम बानपुर, बड़ोखरा, वीर, सूरी, छिल्ला, अजनौरा, कुआगांव, दिदौरा, ऊमरी, उदया, चकौरा, सुनवाहा, दरौनी, पाह, धबारी, पडवां, निवारी, पाली, जखौरा, बम्हौरी बहादुर सिंह, खटौरा, अगौरा, क्योलारी, गुढ़ा भदौरा, छापछौल, मैनवार, सौजना, नैकोरा, गौना, कुसमाड़, भौंड़ी, कोरवास, खिरियाभारन्जू, लरगन, बारौन, भूसरा, कुम्हैड़ी, सैदपुर, नैनवारा, दरौना, छायन, खिरिया लटकनजू, कुआंघोषी, मिदरवाहा, अजान, पठा, सिंदवाहा, जरया, सिलावन, समोंगर, कुरौरा, अमौरा, किसरदा, टपरियन, महरौनी आदि अनेक ग्रामों के किसान शामिल रहे।
एसडीएम के रवैये से असंतुष्ट दिखे किसान
महरौनी (ललितपुर)। किसानों का आक्रोश उस समय और बढ़ गया, जब उपजिलाधिकारी के आने का किसान इंतजार करते रहे, लेकिन वह नहीं पहुंचीं। इसके बाद किसान तहसील परिसर स्थित एसडीएम कार्यालय पर ज्ञापन देने पहुंचे। कार्यालय के बाहर खड़े किसानों ने बार-बार एसडीएम से बाहर आने का आग्रह किया, लेकिन उन्होंने कोर्ट के कामकाज में व्यस्त होने का हवाला देते हुए किसानों से प्रतीक्षा करने की बात कही। लगभग एक घंटे तक इंतजार करने के बाद भी जब वह किसानों के बीच नहीं पहुंची तो किसानों का धैर्य जवाब दे गया और किसानों ने प्रशासन के विरुद्ध जमकर नारेबाजी की।
किसान बेहोश, हालत बिगड़ी
महरौनी (ललितपुर)। किसान जब उपजिलाधिकारी कार्यालय के बाहर तेज धूप में एसडीएम का इंतजार कर रहे थे, तभी धूप में खड़े ग्राम बानपुर निवासी वृद्ध किसान नत्थू पुत्र प्यारेलाल ढ़ीमर (70 वर्ष) की हालत विगड़ गई और वह बेहोश होकर जमीन पर गिर पड़े। यह देख अधिकारियों के हाथ पांव फूलने लगे और आननफानन में वृद्ध किसान को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंचाया गया। जहां चिकित्सकों ने किसान को प्राथमिक उपचार देकर उन्हें जिला चिकित्सालय रेफर कर दिया।