ललितपुर। लॉकडाउन के कारण जनपद के सभी कारोबार पूरी तरह से ठप हैं। ऐसे में मजदूरों के सामने आर्थिक संकट छाया हुआ है तो सरकार को भी कई मदों से मिलने वाला राजस्व भी प्रभावित हो रहा है। एक माह में परिवहन विभाग को सवा दो करोड़ रुपये के राजस्व की क्षति पहुंची है। बसें बंद होने से आवागमन ठप चल रहा है।
राज्य सरकार को परिवहन विभाग से अच्छे राजस्व की आय होती है। लेकिन, देश में कोरोना वायरस के संक्रमण को नियंत्रित करने के लिए 25 मार्च से लॉकडाउन है। तब से अधिकांश वाहनों के पहिये थम गए हैं। इससे जहां वाहनों का संचालन कर परिवार का भरण पोषण करने वाले लोगों के सामने रोजगार का संकट खड़ा हो गया है, वहीं वाहन स्वामी भी अपने आप को बेरोजगार होने से जैसा महसूस कर रहे हैं। इसके अलावा विभाग के राजस्व को भी क्षति पहुंच रही है।
लॉकडाउन से अधिकांश वाहनों की बिक्री वाली एजेंसियां पूरी तरह से बंद चल रही हैं। एजेंसी के कर्मचारी बेरोजगारी की कगार पर आ खड़े हुए हैं। वहीं, वाहनों के बीमा करने वाले व पेट्रोल पंप संचालकों को भी नुकसान हो रहा है। इसके अलावा सरकार को राजस्व भी प्राप्त नहीं हो पा रहा है। जनपद में परिवहन विभाग को सबसे अधिक राजस्व मिलने का आधार वाहनों की ब्रिकी है, लेकिन दुकानों के बंद होने से यह आय पूरी तरह से प्रभावित बनी हुई है। जनपद में लगभग 125 बसों का पंजीकरण है, जिनसे साढ़े सात लाख रुपये प्रतिमाह राजस्व मिलता है। यह भी बंद चल रही हैं। वहीं अन्य वाहनों के संचालन पर भी रोक लगी है। इससे राजस्व पूरी तरह से प्रभावित बना हुआ है। बसें बद होने के कारण सवारियों का आना- जाना ठप है। सहालग के सीजन में बसों में इतनी भीड़ रहती थी कि पैर रखने की भी जगह नहीं मिलती थी। बस आपरेटर साल भर की कमाई दो से तीन महीने में कर लेते थे, लेकिन इस बार लॉकडाउन होने के कारण सब कुछ ठप पड़ा है।
शासन से नहीं आई गाइडलाइन
लॉकडाउन लागू होने से वाहनों के संचालन पर भी प्रतिबंध लगाया गया है। इसके अलावा सीमाएं सील होने से वाहनों की आवाजाही बंद है। ऐसे में टैक्स जमा होना या नहीं होना है। इस संबंध में शासन द्वारा अभी कोई सूचना नहीं मिली है। वर्तमान में केवल अनुमति मिलने वाले ही वाहन चल रहे हैं।
अप्रैल में विभाग को किसी राजस्व की प्राप्ति नहीं हुई है। इससे लगभग दो करोड़ 25 लाख रुपये का राजस्व प्रभावित हो गया है। बीमारी का संकट खत्म होते ही शासन के निर्देश पर अग्रिम कार्रवाई की जाएगी।
- सुरेंद्र कुमार, यात्री कर अधिकारी, सहायक संभागीय परिवहन विभाग