संवाद न्यूज एजेंसी
ललितपुर। कड़ाके की सर्दी ने सांस रोगियों की समस्या बढ़ा दी है। थोड़ी सी लापरवाही पर पुराने रोग उभर रहे हैं। मेडिकल कॉलेज में वार्ड फुल चल रहे हैं तो ओपीडी में अस्थमा व सांस के रोगियों की संख्या दोगुनी हो गई है। सामान्य दिनों में जहां रोजाना औसतन 30 मरीज पहुंच रहे थे, वहीं अब यह 62 तक पहुंच गई है। बीते एक माह में अस्थमा व सांस के तीन मरीजों की मौत भी हो चुकी है।
एक सप्ताह से सर्द हवाएं चलने से गलन भरी सर्दी पड़ रही है। सुबह से ही धुंध व कोहरे से 11 बजे तक सूर्यदेव छिपे रहते हैं। शाम होते ही सर्दी का कहर शुरू हो जाता है। चिकित्सकों का कहना है कि सर्दी में हल्की सी लापरवाही लोगों को बीमार बन सकती है। अस्थमा व सांस रोग से जूझ रहे मरीजों का रोग उभरने लगा है।
शुक्रवार को मेडिकल कॉलेज में फिजीशियन की ओपीडी में लगभग 300 मरीज आए। 62 मरीज अस्थमा व सांस की समस्या के थे, इसमें 50 मरीज नियमित व 12 नए मरीज रहे। पुराने तीन मरीजों को ज्यादा समस्या के चलते भर्ती किया गया। चिकित्सकों का कहना है कि सर्दी में बाहर न निकलें। अलाव तापते रहें।
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नियमित मरीजों की दवाइयों का बढ़ रहा डोज : सांस व अस्थमा के पुराने मरीजों पर दवाइयां असर नहीं कर रही हैं। इसका कारण सर्दी है। चिकित्सकों का कहना है कि पुराने मरीजों को दवाइयाें से राहत नहीं मिल रही है। इससे डोज बढ़ानी पड़ रही है।
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एक माह में तीन की हो चुकी मौत : एक माह में अस्थमा व सांस के तीन मरीज दम तोड़ चुके हैं। बीते माह ग्राम कुरौरा निवासी एक महिला व करमरा निवासी एक व्यक्ति की मौत हुई थी, जबकि 12 जनवरी को जाखलौन निवासी एक वृद्ध की मौत हो गई। मेडिकल कॉलेज के आंकड़ों के अुनसार तीनों मरीजों की मौत अस्थमा व सांस की समस्या से हुई।
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सांस व अस्थमा के मरीज सर्दी में घरों से बाहर न निकलें। ठंडे पानी से न नहाएं। ठंडी वस्तुएं व खटाई का सेवन न करें। एलर्जी से बचाव करें। -डॉ. अंबिका दुबे, फिजिशियन, मेडिकल कॉलेज