ललितपुर। रेल नीर प्लांट को पंख लग गए हैं। रेल मंत्रालय ने नगर मुख्यालय के दस किलोमीटर की परिधि में प्लांट के लिए जमीन की मांग की है। बुधवार को जमीन की तलाश की गई।
यूपीए सरकार के समय रेल बजट में जनपद में रेल नीर प्लांट बनाने की घोषणा की गई थी। इस घोषणा को तत्कालीन केंद्रीय मंत्री प्रदीप जैन आदित्य ने अपनी उपलब्धि के तौर पर काफी प्रचार किया था। हालांकि जनपद में सूखे की हालत को देखते हुए आमजन ने यहां का पानी बोतलबंद कर बेचने का विरोध किया था। काफी समय से ठंडे बस्ते में पड़े इस प्रोजेक्ट को लेकर एक बार फिर से हलचल तेज हो गई हैं। रेल मंत्रालय द्वारा पिछले दिनों स्थानीय प्रशासन को एक पत्र प्राप्त हुआ है।
इसके अनुसार नगर मुख्यालय के 10 किलोमीटर की परिधि में एक एकड़ जमीन की मांग की गई है। इस एक एकड़ जमीन पर रेल नीर प्लांट की स्थापना की जाएगी। पत्र प्राप्त होते ही तहसीलदार अवधेश निगम ने संबंधित लेखपालों को सरकारी जमीन व उपयुक्त जमीन का चिन्हांकन करने के निर्देश दिए हैं। बुुधवार को रेलवे स्टेशन के पास बुढ़वार रोड पर जमीन की तलाश की गई। रेल नीर प्लांट को पीपीपी मॉडल पर तैयार किया जाना है। प्लांट की स्थापना व इसका संचालन आईआरसीटीसी कंपनी द्वारा किया जाएगा। वहीं, इस प्लांट में तैयार होने वाला बोतलबंद पानी रेल नीर नाम के ब्रांड से रेलवे स्टेशनों व रेलगाड़ियों में बेचा जाएगा।
जनपद की स्थिति समझने की जरूरत
बुंदेलखंड का इलाका हमेशा से सूूखे से पीड़ित रहा है। ललितपुर जनपद भी सूखे के अभिशाप से अछूता नहीं रहा है। इस वर्ष भी जनपद सूखे का शिकार रहा और कई इलाकों में पेयजल की कमी के चलते कई किलोमीटर दूर से पानी का इंतजाम करना पड़ा। नगर क्षेत्र में कई इलाकों में टैंकर चलाकर पेयजल की आपूर्ति की गई है। रेल विभाग की प्रारंभिक तौर पर गोविंद सागर बांध से पानी लेकर बोतलबंद पानी तैयार करने की योजना है। गोविंद सागर बांध से पूरे नगरीय क्षेत्र को पेयजल की आपूर्ति होती है। इसके साथ ही 16 हजार हेक्टेयर के क्षेत्र में सिंचाई के लिए पानी भी उपलब्ध कराया जाता है।