ललितपुर। लंका पर विजय प्राप्त करने के लिए रावण से युद्ध के लिए दो दिन पहले भगवान राम व उनकी वानर सेना ने लंका पहुंचने के लिए सेतु बांधा और रामेश्वर भगवान का भव्य अभिषेक किया। रामेश्वर पूजन के लिए रामादल की भव्य शोभायात्रा निकाली गई।
श्री रामलीला हनुमान जयंती महोत्सव समिति के तत्वावधान में शुक्रवार को दशहरा के दिन मवेशी बाजार स्थित रामलीला मैदान में राम-रावण युद्ध का मंचन किया जाएगा। रामादल के भगवान श्रीराम, लक्ष्मण एवं हनुमान के स्वरूपों की भव्य शोभायात्रा श्रीरघुनाथजी बड़ा मंदिर चौबयाना से शुरू होकर रावरपुरा, महावीरपुरा, घंटाघर, सावरकर चौक, आजाद चौक होते हुए शहजाद नदी के पुल से पहले स्थित श्रीरामेश्वरम मंदिर पहुंची, जहां रामादल द्वारा श्रीरामेश्वरम महादेव भगवान का वैदिक रीति से पूजन किया गया, यहां भगवान शिव का पंचामृत अभिषेक भगवान श्रीराम के स्वरूप द्वारा किया गया और फिर भगवान रामेश्चवर को प्रसन्न करने कर सेतु समुद्रम का निर्माण करने की रस्म अदायगी की गई। समिति के अध्यक्ष पं. बृजेश चतुर्वेदी ने बताया कि दुर्गाष्टमी के अवसर पर भगवान श्रीराम ने श्री रामेश्वरम पुल की स्थापना की थी, जिसका उद्देश्य मानव जाति के कल्याण के निमित्त यह हुआ था विष्णु अवतार में भगवान श्रीराम ने स्वयं भगवान शिव के ज्योर्तिलिंग स्वरूप की स्थापना करके भगवान शिव का रुद्राभिषेक पूजन किया था। फिर भगवान श्रीराम ने इसी सेतु से लंका पर चढ़ाई करके आताताई रावण का वध करके लंका पर विजय प्राप्त की। शोभायात्रा के दौरान समिति के रमेश रावत, श्यामाकांत चौबे, राजेश दुबे, अमित तिवारी, प्रबल सक्सेना, राजीव हुंडैत, हरविंदर सलूजा, भरत रिछारिया, धर्मेंद्र चौबे, राजेंद्र तामियां, अवधेश कौशिक, शिवकुमार शर्मा, चंद्रशेखर राठौर, हरीमोहन चौरसिया, ललित कौशिक, जगदीश पाठक, अनुराग चौबे, धु्रव राजा, रुपेश साहू, सोनू जायसवाल, राकेश तामियां उपस्थित रहे ।