ललितपुर। जेल में बंद गरीब बंदियों में छूटने की नई उम्मीद जगी है। जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की ओर से जिला कारागार में निरूद्ध बंदियों को निशुल्क एवं प्रभावी विधिक सहायता उपलब्ध कराने के उद्देश्य से नामित पैनल अधिवक्ता निर्धारित दिवसों पर जेल विजिट कर बंदियों की समस्याएं सुन रहे हैं और उन्हें आवश्यक कानूनी सहायता भी उपलब्ध करा रहे हैं। अब तक पैनल अधिवक्ताओं के माध्यम से सत्तर से अधिक बंदियों के मामलों को चिह्नित कर उनकी पैरवी की जा रही है, ताकि उन्हें कानूनी सहायता उपलब्ध कराई जा सके।
विधिक सेवा प्राधिकरण की इस पहल से उन बंदियों में भी न्याय की उम्मीद जगी है, जिनकी पैरवी करने वाला कोई नहीं था और जो आर्थिक या अन्य कारणों से अपने मुकदमों की पैरवी नहीं कर पा रहे थे। जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के सचिव देवप्रिय सारस्वत की ओर से बीते 16 सितंबर को जारी आदेश के अनुसार, नामित पैनल अधिवक्ताओं की साप्ताहिक जेल विजिट निर्धारित की गई है। इसके अंतर्गत बंदियों से संपर्क कर उनकी लंबित वादों, जमानत, अपील, विधिक प्रतिनिधित्व एवं अन्य कानूनी समस्याओं की जानकारी प्राप्त की जा रही है। नामित पैनल अधिवक्ताओं ने जेल विजिट के दौरान अभी तक लगभग सत्तर से अधिक मामलों को चिह्नित किया है। अब पैनल अधिवक्ता इन जरूरतमंद बंदियों की पैरवी कर उन्हें निशुल्क विधिक सहायता पहुंचाने का काम करेंगे।
विधिक सेवा प्राधिकरण की इस व्यवस्था का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि कोई भी जरूरतमंद बंदी केवल आर्थिक अभाव या अधिवक्ता उपलब्ध न होने के कारण न्याय से वंचित न रहे। जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की यह पहल इस संदेश को मजबूत करती है कि न्याय केवल साधन संपन्न लोगों का अधिकार नहीं, बल्कि प्रत्येक व्यक्ति का अधिकार है।
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कैप्सन-रोहित कुशवाह।
जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की यह पहल अत्यंत सराहनीय है। जेल में निरूद्ध ऐसे बंदियों को निशुल्क विधिक सहायता मिलना, जिनकी पैरवी करने वाला कोई नहीं है पुण्य का कार्य है। वास्तव में आर्थिक अभाव के कारण किसी भी व्यक्ति को न्याय से वंचित नहीं रहना चाहिए।
-रोहित कुशवाह, पैनल अधिवक्ता।
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कैप्सन-निधि सिंह।
न्याय की वास्तविक सार्थकता तभी है, जब समाज के अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति तक भी न्याय पहुंचे। जिला कारागार में बंदियों को निशुल्क विधिक सहायता उपलब्ध कराने की यह पहल मानवता और संवैधानिक मूल्यों का सम्मान है। इससे उन बंदियों में भी नई उम्मीद जगेगी, जो अब तक स्वयं को अकेला और असहाय महसूस कर रहे थे।
-निधि सिंह, पैनल अधिवक्ता।