ललितपुर। राजकीय इंटर कॉलेज के छात्रों की अंकतालिका में अंक प्रदर्शित नहीं होने और सोमवार रात को छात्रों पर पुलिस द्वारा लाठियां फटकारने के मामले में जनप्रतिनिधि प्रशासन की कार्यप्रणाली से खफा हैं। सदर विधायक ने कहा कि छात्रों के अंक नहीं आने और दो दिन पहले हुई पुलिस की कार्रवाई दोनों ही गलत है। हालांकि डीएम अन्नावि दिनेश कुमार ने कहा कि छात्र हित सर्वोपरि है, छात्रों पर कार्रवाई नहीं होगी। अराजक तत्वों को चिंह्ति करने के निर्देश दिए गए हैं।
राजकीय इंटर कॉलेज में बारहवीं के 877 छात्रों की अंकतालिका में नंबर प्रदर्शित नहीं होने को लेकर छात्र रिजल्ट आने के बाद से ही आंदोलित हैं और लगातार प्रदर्शन कर स्कूूल प्रशासन से उनकी अंकतालिका में अंक चढ़वाने की मांग कर रहे हैं। इसी मामले में 13 सितंबर की रात में जीआईसी में बैठक के दौरान मामला गरमा गया था। आरोप है कि छात्रों ने गेट पर ताला लगाकर नारेबाजी की तो पुलिस ने उन पर लाठियां फटकार कर उन्हें भगाया।
घटना के दौरान भागते समय कई छात्रों को चोटें भी आईं। इस पूरे प्रकरण से जनप्रतिनिधि भी काफी खफा हैं। मंगलवार की रात को अफसरों के साथ हुई बैठक में सदर विधायक रामरतन कुशवाहा व राज्यमंत्री मनोहर लाल पंथ ने इस मामले में सख्त नाराजगी जताते हुए जिला प्रशासन की बैठक में छात्रों पर दर्ज हुए मुकदमों को वापस करने के लिए कहा। जिस पर बैठक में जिलाधिकारी अन्नावि दिनेश कुमार ने छात्र हित को सर्वोपरि बताते हुए कहा कि छात्रों पर कार्रवाई नहीं होगी। वहीं घटना की दोषी अराजक तत्वों को चिह्नित किए जाने के निर्देश भी दिए। इसके साथ ही जिलाधिकारी ने छात्रों से अपील की कि 18 से होने वाली परीक्षाओं में छात्र प्रतिभाग करें।
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प्रशासन कुलपति से बात करे, प्रमोट ऑप्सन खुलने से छात्रों को मिल सकेगा प्रवेश
जिन छात्रों के अंकतालिका में अंक प्रदर्शित नहीं हो रहे हैं, ऐसे छात्रों को उच्च शिक्षा में प्रवेश के लिए प्रशासन विश्वविद्यालय के कुलपति से बात करे और प्रवेश में प्रमोट का ऑप्शन खुल जाए तो बच्चों को प्रवेश मिल जाएगा और अंकतालिका में अंक मिलने पर उन्हें प्रवेश में आसानी हो सकेगी। साथ ही हर महाविद्यालय में ऐसे छात्रों के प्रवेश के लिए 30-30 सीटें रोक ली जाएं तो छात्रों का भविष्य सुरक्षित हो सकता है।
अवधेश अग्रवाल, प्राचार्य, नेहरू महाविद्यालय।
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बोले अधिवक्ता-उच्च स्तरीय जांच करवाकर दोषियों पर कार्रवाई हो
छात्रों की अंकतालिका में अंक नहीं चढ़ाए गए और बाद में अपनी मांगे रखने पर उनके साथ पुलिस का व्यवहार काफी निंदनीय है। इसकी न्यायिक अधिकारियों से उच्च स्तरीय जांच करवाकर दोषियों पर कार्रवाई होनी चाहिए। अंक सूची में प्राथमिकता से छात्र हित में पहल करना चाहिए, ताकि उनका भविष्य खराब न हो।
ओमप्रकाश घोष, अध्यक्ष, जिला बार एसोसिएशन।
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छात्रों द्वारा मौलिक अधिकार के तहत अंकतालिका में अंक चढ़वाने की मांग की गई है। उन पर पुलिसिया दमनकारी कार्रवाई की घोर निंदा होनी चाहिए और सभी छात्रों पर दर्ज मुकदमा का स्पंज कर खत्म किया जाना चाहिए।
श्रीप्रकाश चौबे, अधिवक्ता।
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बोले छात्र नेता-प्रधानाचार्य व कमेटी पर कार्रवाई की जाए
प्रशासन और शिक्षा विभाग की गलती है। छात्रों पर पुलिस की जो कार्रवाई हुई, इसके जिम्मेदारों पर कार्रवाई की जानी चाहिए। अंकसूची केे मामले में की गई लापरवाही पर प्रधानाचार्य व कमेटी पर कार्रवाई की जाए।
सतेंद्र सिंह यादव सेतु, जिलाध्यक्ष, सपा छात्रसभा।
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स्कूल में छात्रों को बैठक के लिए बुलाया था, जहां रणनीति के तहत पुलिस की कार्रवाई की गई और फिर मुकदमा दर्ज कराया गया, यह घोर निंदनीय है। शासन व प्रशासन छात्रों का भविष्य खराब न करें।
रितिक शुक्ला मोंटी, जिलाध्यक्ष, एनएसयूआई।
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बोले छात्र-नंबर भी नहीं दिए, लाठियां भी फटकारीं
स्कूल प्रशासन द्वारा नंबर तो नहीं दिए गए, लेकिन छात्रों को लाठियां जरूर मिल गईं। बैठक के लिए बुलाया था। स्कूल व पुलिस प्रशासन की कार्रवाई गलत है। स्कूल की गलती भी रही और मुकदमा भी दर्ज कराया, जबकि गलती छात्रों की नहीं थी।
कपिल सेन, छात्र।
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अंकतालिका में अंक नहीं आने से प्रवेश में दिक्कत आ रही है। बीएससी एग्रीकल्चर में प्रवेश लेना था, जिसका फार्म भी भरा है और इसकी परीक्षा 17 सितंबर को है। अब ऐसे में परीक्षा कैसे देंगे। पूरा साल बर्बाद हो जाएगा।
-हर्ष सेन, छात्र।
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बच्चों पर पुलिस कार्रवाई गलत हुई है। बच्चों को उनके नंबर दिए जाएं, वरना बच्चे आगे क्या करेंगे और आगे पेपर कैसे देंगे। कई छात्रों को एक साल बर्बाद हो जाएगा। जिला प्रशासन इस प्रकरण में बच्चों की सहायता करे।
-रेखा सेन, अभिभावक।
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मैं भी बैठक में गया था और अन्य छात्रों की भांति सभी छात्रों को नंबर दिए जाने की बात रखी। बातचीत शांतिपूर्ण तरीके से हुई। जब एसडीएम जाने वाले थे, तभी गेट में ताला डाल दिया, तब पुलिस आई और लाठियां फटकारी। यह सब गलत हुआ। प्रशासन को छात्र हित में निर्णय लेना चाहिए।
-एसपी सक्सेना, अभिभावक