प्रदेश में 15 जुलाई से पॉलिथीन प्रतिबंधित की जा रही है। शहरवासी योगी सरकार के इस निर्णय के साथ नजर आ रहे हैं। लोगों का कहना है कि इससे न केवल ड्रेनेज सिस्टम सुधरेगा बल्कि मूक जानवरों की असमय मौत पर अंकुश लग सकेगा। लेकिन, अखिलेश सरकार की तरह प्रतिबंध का बेअसर साबित नहीं हो जाए, इसे लेकर आशंकित भी दिख रहे हैं। हालांकि, पर्यावरण विशेषज्ञ पॉलिथीन को पर्यावरण एवं मानव जीवन के लिए बड़ा खतरा मानते हैं।
जब शहर के बाजारों में पॉलिथीन की थैली बिक्री के लिए आई तो इसे हाथोंहाथ लिया गया। इससे यह हुआ कि कपड़े के थैलों का चलन लगभग बंद सा हो गया। उसकी जगह पॉलिथीन की थैलियों ने ले लिया। बाजार में कहीं भी कोई सामान लेने की याद आई तो बिना थैले के दैनिक उपयोग की सामग्री खरीद ली। दुकानदार ने भी बगैर कुछ कहे पॉलिथीन की थैली निकाली और उसमें खरीदा सामान रख दिया। धीरे-धीरे यह सुविधा लोगों के लिए दुखदाई बन गई। जिन थैलियों में लेकर लोग सामान लेकर घर पहुंचे, उससे सामान निकालकर पॉलिथीन को यूं ही फेंक दिया गया। वह हवा के झोके के साथ नालियों में पहुंच गई। जिससे नालियां चोक हो गई।
सबसे ज्यादा नुकसान उन पॉलिथीन से हुआ, जिनमें लोगों ने खाद्य सामग्री रखी और फिर उसे खाली कर सड़क के बाहर फेक दिया। यहां-वहां विचरण कर रहे जानवर आए और वे खाद्य सामग्री से सनी पॉलिथीन को सीधे निगल गए। इस तरह कई जानवरों के गले व पेट में दर्जनों पॉलिथीन पहुंच गई। जिससे उनकी असमय मौत हो गई। अब प्रदेश में 15 जुलाई से पॉलिथीन प्रतिबंधित करने की तैयारी है। इस संबंध में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मुख्य सचिव डा. अनूूप चंद्र पांडेय को निर्देश जारी कर चुके हैं। उम्मीद जताई जा रही है कि नगर विकास विभाग 10 जुलाई को ही प्रदेश में 50 माइक्रॉन तक के पॉलिथीन के इस्तेमाल पर प्रतिबंध लगाने संबंधी आदेश जारी कर देगा। लेकिन कुछ लोग सरकार के फैसले पर आशंकित नजर आए। उनका कहना है कि अखिलेश सरकार ने भी पॉलिथीन को प्रतिबंधित किया था लेकिन इसका असर ज्यादा दिन तक नहीं रह सका। कहीं योगी सरकार के निर्णय का भी इसी तरह का हश्र न हो। हालांकि, तमाम लोग योगी आदित्यनाथ से कठोर कार्रवाई के लिए आशान्वित भी दिखे।