संवाद न्यूज एजेंसी
झांसी। भारत और दूसरे मुल्कों में रहकर लोगों को ठगी का शिकार बना रहे साइबर अपराधियों को पकड़ने के लिए अब साइबर थाने की पुलिस ने उनका सुराग पाने को अमेरिका तक ई-मेल भेजे हैं। पुलिस ने बीते एक माह में 700 से अधिक ई-मेल किए हैं। जिससे अपराधियों की लोकेशन से लेकर अन्य जानकारियां जुटाई जा रही हैं। क्योंकि, विभिन्न आईटी कंपनियों के सर्वर अमेरिका में ही हैं, ऐसे में भारत से उसका डाटा एकत्र कर पाना मुमकिन नहीं होता। वहीं, दूसरी समस्या यह भी है कि डार्क वेब के चलते यह जानकारी जुटा पाना आसान नहीं हो रहा।
कुछ साल पहले तक पुलिस साइबर फ्रॉड करने वालों का पता उनके मोबाइल या लैपटॉप की लोकेशन या आईपी एड्रेस से लगा लेती थी लेकिन, अब साइबर फ्रॉड डार्क वेब पर आते जा रहे हैं। यह इंटरनेट की ऐसी दुनिया है, जो अपने नाम की तरह ही अंधेरी है। यहां किसी का भी पता लगाना आसान नहीं है। इस पर चलने वाले सभी वेब पेज अमेरिका में स्थापित सर्वर पर चलते हैं। जिससे इनका अधिकार और उससे जुड़ी जानकारी भी अमेरिका से ही मिल सकती है। यही कारण है कि झांसी साइबर थाना पुलिस को अब अपराधियों का पता लगाने के लिए अमेरिका तक ई-मेल भेजकर जानकारी जुटानी पड़ रही है। साइबर थाने में आने वाले मामलों में जब पुलिस आईपी एड्रेस या लोकेशन खंगाल रही है तो अपराधियों की सटीक लोकेशन पता नहीं चल पा रही है। हालांकि, पीड़ित के लिए राहत की बात यह है कि पुलिस फ्रॉड होते ही सबसे पहले दूसरे अकाउंट में गई रकम फ्रीज कर रही है। ऐसे में फ्रॉड पैसे की निकासी नहीं कर पा रहे हैं।
- प्रतिदिन भेज रहे 24 ई-मेल
साइबर थाने में आने वाले मामलों की विवेचना के लिए यहां से अमेरिका और भारत के विभिन्न शहरों में खोले गए कंपनी के ऑफिस के पते पर झांसी साइबर थाना पुलिस प्रतिदिन औसतन 24 ई-मेल कर रही है। इसका मकसद साइबर फ्रॉड की संपूर्ण जानकारी लेना है।
वर्जन
अमेरिका और भारत में सर्वर प्रदाता को भेजे जा रहे ई-मेल का समय पर उत्तर नहीं मिल पा रहा है। ऐसे में मामले का खुलासा करने में देरी हो जाती है। यदि जल्दी उत्तर मिल जाए तो विवेचना और मामले का खुलासा आसान हो सकेगा।
आरके सिंह, प्रभारी निरीक्षक/साइबर एक्सपर्ट, साइबर थाना, झांसी।