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पार्किंग, होर्डिंग का ठेका निरस्त

Tue, 01 Mar 2016 01:32 AM IST
ब्यूरो
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ललितपुर। नगर पालिका से पिछले दिनों हुए पार्किंग शुल्क और होर्डिंग के ठेके का पूरा पैसा जमा नहीं करने पर ठेका निरस्त करके ठेकेदार की सिक्योरिटी जब्त कर ली गई। साथ ही नोटिस जारी किया गया है।
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गत मंगलवार को नगरपालिका कार्यालय में आठ ठेकों की नीलामी प्रक्रिया आयोजित की गई थी, लेकिन इसमें से सिर्फ पांच ठेके हुए थे। इसमें से पशु रजिस्ट्रेशन, कैंटीन ठेका, साइकिल स्टैंड ठेका, ठेला पार्किंग ठेका और विज्ञापन होर्डिंग कर वसूली ठेका 9.46 लाख रुपए में हो गया था। इसके लिए ठेकेदारों से जमानत राशि जमा कराई गई थी। साथ ही ठेकों की बाकी रकम जमा करने के लिए तीन दिन की मोहलत दी गई थी।

ठेला पार्किंग का ठेका 3.16 लाख रुपए में हुआ था। इसी तरह विज्ञापन होर्डिंग कर वसूली ठेका छह माह के लिए 2.55 लाख रुपए का हुआ था। इसमें तय किया गया था कि ठेकेदार द्वारा पालिका से निर्धारित पांच रुपए प्रति वर्ग फुट वार्षिक  शुल्क के आधार पर किराया वसूला जाएगा। साथ ही पब्लिसिटी एजेंसियों  द्वारा शहर में मात्र 105 होर्डिंग लगाने के स्थल की अनुमति दी गई थी।
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ठेला पार्किंग और विज्ञापन होर्डिंग कर वसूली ठेका की बोली ठेकेदार शिवकांत पुरोहित के नाम छूटी थी। उनका पैसा जमानत राशि के तौर पर क्रमश: बीस हजार रुपए और चालीस हजार रुपए जमा था। इस आधार पर उन्हें ठेका दे दिया गया था, लेकिन शर्त थी कि पूरा पैसा तीन दिन में जमा करना था।

लेकिन, तीन दिन गुजरने के बाद भी ठेकेदार ने पूरा पैसा जमा नहीं किया। इसपर उनका ठेका निरस्त कर दिया गया और दूसरे बोली दाता अब्दुल जाहिद के नाम ठेका कर दिया गया। साथ ही इसके लिए ठेकेदार शिवकांत पुरोहित को नोटिस जारी कर दिया गया।

ठेकों में पूल हुआ या नहीं, इस बारे में कुछ नहीं कहा जा सकता है, लेकिन ठेकेदार को नोटिस जारी कर दिया गया है।
-हेमंत सिंह, कर अधीक्षक, नगरपालिका झांसी ।

साख खराब हुई
ललितपुर। नगर पालिका में बोली लगाने के बाद ठेका शिवकांत पुरोहित के नाम आवंटित कर दिया गया, लेकिन पैसा जमा नहीं करने के कारण उनकी साख खराब हुई और ठेका दूसरे ठेकेदार के नाम हो गया।  हालांकि, नियम है कि यदि ठेकेदार के नाम बोली छूट जाती है और पैसा जमा नहीं करता है तो अगली बार वह ठेके में भाग नहीं ले सकता है, लेकिन इस बारे में अधिकारी कुछ भी कहने से बच रहे हैं।

कहीं पूल तो नहीं?
ललितपुर। दोनों ठेकों में दूसरे बोली दाता का एक ही व्यक्ति हैं। ऐसे में सूत्र बताते हैं कि ठेका पूल के आधार पर हुआ था। दिलचस्प बात यह है कि पहले दोनों ठेके एक ही व्यक्ति के नाम हुए थे और सिक्योरिटी जब्त होने के बाद भरी दोनों ठेके एक ही व्यक्ति के नाम आवंटित हो गए। ऐसे में जानकार ठेका पूल होने की बात मान रहे हैं।
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