सिलावन (ललितपुर)। विकासखंड महरौनी के अंतर्गत ग्राम खटौरा के अभिभावक गांव में चल रही शिक्षण व्यवस्था से खुश नहीं हैं। जहां शिक्षक अपनी जिम्मेदारियों के प्रति उदासीन बने हुए हैं, वहीं मध्याह्न भोजन भी मेन्यू के अनुसार नहीं बनाया जा रहा है। उच्चाधिकारी भी विद्यालय के निरीक्षण की आवश्यकता नहीं समझते, जिससे अभिभावकों में रोष है।
जिले की परिषदीय शिक्षा में गुणात्मक सुधार शिक्षकों की उदासीनता के कारण नहीं हो पा रहा है, जबकि नौनिहालों के बेहतर भविष्य के लिए सर्व शिक्षा अभियान के अंतर्गत परिषदीय शिक्षा पर करोड़ों रुपये हर वर्ष खर्च किया जा रहा है। गरीब बच्चों को हीन भावना से उबारने और स्कूली माहौल बनाने के लिए गण वेश की योजना संचालित हो रही है।
इसके अलावा मध्याह्न भोजन योजना, विद्यालय की मरम्मत, स्कूल भवन निर्माण, आवश्यकता के अनुसार अतिरिक्त कक्षा-कक्ष, ज्ञानपरक कंप्यूटर शिक्षा, शिक्षकों के प्रशिक्षण आदि पर करोड़ों रुपए हर वर्ष खर्च हो रहा है। बावजूद इसके विद्यालयों में शैक्षिक माहौल नहीं बन पा रहा है।
इन्हीं विद्यालयों में से एक है, प्राथमिक विद्यालय ग्राम खटौरा। यहां के अभिभावकों ने शिक्षकों पर शिक्षण कार्य में शिथिलता बरतने का आरोप लगाते हुए बताया कि यहां के नौनिहालों का शैक्षिक स्तर बिल्कुल निम्न स्तर का है। शिक्षक हाजरी भरने के बाद घर चले जाते हैं। उनकी अनुपस्थिति में शिक्षा मित्र विद्यालय का संचालन करते हैं।
गैस सिलेंडर शिक्षक के घर की शोभा बढ़ा रहा है।
उन्होंने विभागीय अधिकारियों पर आरोप लगाते हुए बताया कि वह भी विद्यालय का निरीक्षण करने की जहमत नहीं उठाते हैं, जिससे विद्यालय में तैनात शिक्षकों के हौसले बुलंद हैं और मनमर्जी से शिक्षण कार्य कर रहे हैं। अभिभावकों ने जनहित में उच्चाधिकारियों से विद्यालय में शिक्षण व्यवस्था दुरुस्त कराने की मांग जिलाधिकारी से की है।
शैक्षिक कार्य के प्रति उदासीन शिक्षक
अभिभावक मंगल सिंह राजपूत बताते हैं कि विद्यालय में तैनात शिक्षक बच्चों की पढ़ाई के प्रति उदासीन हैं। शिक्षक हाजरी भरने के बाद विद्यालय छोड़ कर चले जाते हैं, जिससे बच्चों की शिक्षा प्रभावित हो रही है। इसके लिए उन्होंने विभागीय अधिकारियों को भी जिम्मेदार ठहराया है।
मेन्यू के अनुसार नहीं बनता मिड डे मील
अभिभावक जगदीश सिंह का कहना है कि विद्यालय में न तो गुणवत्तापरक और न ही मेन्यू के अनुसार मिड डे मील बनाया जा रहा है। इतना ही नहीं मिड डे मील लकड़ी के चूल्हे पर बनाया जा रहा है, जबकि गैस सिलेंडर पिछले कई महीनों से शिक्षक के घर की शोभा बढ़ा रहा है।
अधिकारी नहीं करते विद्यालय का निरीक्षण
अभिभावक गोकुल सिंह विद्यालय की शिक्षण व्यवस्था चौपट होने के पीछे विभागीय अधिकारियों को जिम्मेदार मानते हैं। उनका आरोप है कि अधिकारियों द्वारा निरीक्षण नहीं करने से शिक्षकों को किसी भी तरह की कार्रवाई का भय नहीं होता हैं, जिससे वह मनमर्जी से विद्यालय का संचालन कर रहे हैं।