ललितपुर। जिला पंचायत चुनाव के लिए जारी आरक्षण सूची से सात वर्तमान जिला पंचायत सदस्य अपने वार्ड से चुनाव नहीं लड़ सकेंगे। ये सदस्य पिछला चुनाव आरक्षित सीट से जीते थे, लेकिन इस बार राजनीतिक गणित बिगड़ जाने से मायूस हैं। इस कारण चुनाव लड़ने की हसरत पाले दावेदार नई जमीन तलाश रहे हैं।
छह ब्लाक के 21 जिला पंचायत सदस्यों का चुनाव वार्डवार होगा। खांदी, बुढ़वार, थनवारा, बांसी, जाखलौन, नाराहट, सिलावन, बार और खितवांस सामान्य सीट होने कारण यहां से सभी वर्ग के दावेदार चुनाव लड़ सकते हैं। अन्य पिछड़ा वर्ग के लिए आरक्षित सीटों में पारौन, बानपुर, गुढ़ा, कैलगुवां, मड़ावरा, सैदपुर, पूराकलां, बिरधा, थानागांव, बालाबेहट, सौरई और जखौरा हैं। इन्हीं सीटों से पिछली बार के जिला पंचायत के सात सदस्यों का राजनीतिक समीकरण बिगड़ जाने से उन्हें अपनी सीट छोड़नी पड़ सकती है।
थानागांव क्षेत्र पिछड़ी सीट के लिए आरक्षित था, लेकिन इस बार अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित हो जाने से पूर्व सदस्य अटल देवी चुनावी जंग से बाहर हो जाएंगी। इसी प्रकार विरधा अनुसूचित जाति सीट पर चुनाव जीतीं जयश्री खटीक को भी ओबीसी सीट होने से लड़ाई से बाहर होना होगा। पिछली बार अनुसूचित जनजाति की बालाबेहट सीट से चुनी गई बंटी बाई इस बार अनुसूचित जाति की सीट हो जाने से चुनावी जंग से बाहर हो गई हैं। अनुसूचित जाति महिला सीट पर सौरई से सदस्य बनीं बबीता कुमारी की सीट ओबीसी के लिए आरक्षित हो जाने से लड़ाई से बाहर हो गई हैं। सैदपुर की ओबीसी सीट से सदस्य चुनी गईं सुधा सोनी की सीट एससी हो गई है,इस कारण उन्हें भी राजनीतिक गलियारे से या तो बाहर आना होगा या फिर सीट बदलकर चुनाव लड़ना पड़ेगा। गुढ़ा में अनारक्षित सीट पर चुने गए चंद्रशेखर खरे भी सीट परिवर्तन से लड़ाई से बाहर दिख रहे हैं। कैलगुवां पिछड़ी जाति महिला सीट से जिला पंचायत सदस्य बनीं सुखदेन राजपूत इस बार अनुसूचित जाति महिला के लिए आरक्षित हो जाने से चुनावी जंग से बाहर हो गई हैं।