ललितपुर। कोरोना काल में ग्रामीण क्षेत्र में उपचार मुहैया कराने के लिए बने प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र से सुविधा नहीं मिल पा रही है। यहां पर 23 नए प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र हैं। लेकिन 12 अस्पतालों में एलोपैथी चिकित्सक ही नहीं है। इतना ही नहीं छह अस्पतालों में तीन वर्ष से अधिक समय से चिकित्सक तक नहीं है। यहां फार्मासिस्ट ही इलाज कर रहे हैं। ऐसे में क्षेत्र के लोगों को उपचार के लिए परेशान हो रहे हैं।
शासन द्वारा एक दशक से अधिक समय पहले ग्रामीण क्षेत्रों में उपचार की सुविधा के लिए करोड़ों रुपये की लागत से प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र का निर्माण कराया गया था। जिसमें एलोपैथी चिकित्सक, फार्मासिस्ट, लैब टेक्नीशियन, वार्ड ब्वॉय और अन्य स्टाफ की तैनाती होनी थी। इसके साथ ही अस्पताल में मरीजों को सामान्य जांच, रक्तचाप, मधुमेह और टाइफाइड, मलेरिया आदि की जांच व उपचार की सुविधा दिए जाने का उद्देश्य था।
यहां पर मरीज उपचार की आस लेकर अस्पताल पहुंच रहे हैं, जहां पर चिकित्सक न होने पर मायूस होकर लौट जाते हैं। ऐसे में कई निर्धन मरीज क्षेत्र में झोलाछाप से इलाज करा लेते हैं।
जिले में संचालित 23 नया प्राथमिक स्वास्थ्य केद्रों में 11 अस्पतालों में एलोपैथी चिकित्सकों द्वारा उपचार दिया जा रहा है। लेकिन 12 अस्पतालों में लगभग तीन वर्ष बाद भी एलोपैथी चिकित्सक नहीं है। इनमें छह अस्पतालों में कोई चिकित्सक नहीं हैं, केवल फार्मासिस्ट ही इलाज कर रहे हैं। वहीं, छह अन्य अस्पतालों में केवल आयुर्वेदिक चिकित्सकों द्वारा संचालित किए जा रहे हैं।
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इन अस्पतालों में नहीं है चिकित्सक
ब्लॉक तालबेहट के ग्राम पूराबिरधा में तैनात चिकित्सक को तालबेहट अधीक्षक नियुक्त किया गया है। वहीं बुढ़वार में तैनात चिकित्सक को मुख्यालय अटैच किया गया है। इसके साथ ही किसलवास, गौना कुसमाड़, सैदपुर, डोंगराकलां आदि अस्पतालों को फार्मासिस्ट ही संचालित कर रहे हैं। यहां पर कई मरीज चिकित्सक न होने पर बिना इलाज के लिए वापस लौट जाते हैं।
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यहां है सिर्फ आयुर्वेदिक अस्पताल
ब्लाक जखौरा के बांसी में तैनात चिकित्सक झांसी में अटैच हैं, दैलवारा में तैनात चिकित्सक जिला महिला अस्पताल में अटैच हैं, यहां पर आयुर्वेदिक चिकित्सक सेवाएं दे रहे हैं। वहीं मड़ावरा, गौना, मदनपुर, कल्यानपुरा, बालाबेहट, आदि अस्पतालों में केवल आयुर्वेदिक चिकित्सक ही मरीजों का उपचार कर रहे हैं।
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जिले में चिकित्सकों की भारी कमी है। जिसको लेकर अधिकारियों से वार्ता की जा रही है। साथ ही कुछ चिकित्सक व फार्मासिस्ट कोविड अस्पताल में तैनात है। इस पर जिलाधिकारी से वार्ता कर फार्मासिस्ट को अस्पताल भेजा जाएगा। चिकित्सकों की नियुक्ति होने पर अस्पतालों में तैनात किया जाएगा।
डॉ. मुकेश चंद्र दुबे, प्रभारी मुख्य चिकित्सा अधिकारी
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अस्पताल में चिकित्सक नहीं होने से इलाज के लिए परेशानी हो रही है। निजी चिकित्सकों को अधिक पैसे देकर इलाज कराना पड़ रहा है। लक्ष्मीकांत तिवारी
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गांव में अस्पताल भले ही निर्माण करा दिया गया हो, लेकिन अब तक स्थायी समय के लिए चिकित्सक तैनात नहीं हो सका है। ढिल्लन भौंड़ेले
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अस्पताल में चिकित्सक तो दूर फार्मासिस्ट तक नियुक्त नहीं हो सका है। ऐसे में सामान्य मरीजों को भी उपचार नहीं मिल पा रहा है। धनीराम
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अस्पताल में स्थायी चिकित्सक को नियुक्त किया जाए। इससे क्षेत्र के लोगों केे इलाज मिल सके और बाहर न जाना पड़े। रूपसिंह यादव