जिला अस्पताल में पुरुष वार्ड में भर्ती मरीज
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ललितपुर। पिछले दिनों कोराना संक्रमित मरीज की मौत हो जाने के बाद अस्पताल में भर्ती मरीज दहशत के कारण अस्पताल से भाग गए थे, जिससे सन्नाटा पसर गया था। आज बृहस्पतिवार को जिला अस्पताल की इमरजेंसी में नये मरीज भर्ती किए गए। वर्तमान में 14 मरीज पुरुष वार्ड में भर्ती है, जिनका इलाज किया जा रहा है। यह सभी अलग- अलग बीमारियों से पीड़ित हैं।
जिला अस्पताल में पूरे जिले से लोग उपचार कराने आते हैं। कोरोना संक्रमण से पहले जब यहां ओपीडी चलती थी, तो प्रतिदिन डेढ़ से दो हजार मरीज इलाज कराने आते थे। लगभग दो सौ मरीजों को भर्ती की सुविधा है। इससे अस्पताल में काफी भीड़ जुटी रहती थी। कोरोना वायरस के संक्रमण को रोकने के लिए एक स्थान पर अधिक भीड़ एकत्रित न हो, इसलिए ओपीडी सेवा को 22 मार्च से बंद कर दिया गया है। तब से अस्पताल में केवल आपातकालीन उपचार की ही सुविधा मुहैया कराई जा रही है। अस्पताल में इमरजेंसी में इलाज के दौरान आवश्यकता पड़ने पर भर्ती भी किया जा रहा है।
जिला अस्पताल में काउंसलर पद पर कार्यरत संविदा स्वास्थ्य कर्मी की पिछले दिनों तबीयत खराब हो गई थी, जिसे अस्पताल के प्राइवेट वार्ड में भर्ती किया गया था, जहां पर उसका दो दिन तक उपचार चला। इस दौरान सांस लेने में दिक्कत के कारण कोरोना सैंपल लिया गया था। इस दौरान अस्पताल के कई कर्मचारी भी स्वास्थ्य का हाल जानने के लिए उसके पास पहुंचे थे और मरीज स्वयं भी स्टाफ से मिलता रहा। हालत में सुधार नहीं होने पर सात मई की रात्रि में झांसी के लिए रेफर कर दिया गया। महारानी लक्ष्मीबाई मेडिकल कॉलेज झांसी में उसे कोविड वार्ड में भर्ती किया गया। जहां पर इलाज के दौरान आठ मई को उसकी मौत हो गई। मौत के अगले दिन नौ मई को उसकी जांच रिपोर्ट में कोरोना पॉजीटिव की पुष्टि हुई। जैसे ही मृत व्यक्ति की जांच रिपोर्ट में कोरोना की पुष्टि हुई तो यह सूचना आग की तरह फैल गई। जिला अस्पताल में खबर पहुंचते ही अस्पताल के वार्डों में भर्ती विभिन्न रोगों के मरीज एक-एक करके उपचार पूरा कराए बिना ही भाग गए थे। इससे अस्पताल सूना हो गया था। आपातकालीन सेवाएं ठप हो गईं थीं और आइसोलेशन वार्ड में भी ताले पड़ गए थे। तब से अस्पताल में मरीजों को भर्ती की सेवाएं पूरी तरह से बंद चल रहीं थी। इसके बाद अस्पताल प्रबंधन से अस्पताल को सैनिटाइज कराया। मृतक व्यक्ति के परिजनों और संपर्क में आने वाले स्वास्थ्य कर्मियों और चिकित्सकों की रिपोर्ट निगेटिव आ गई, तो सभी ने राहत की सांस ली। अस्पताल में चार दिन बाद रोगियों को भर्ती करने की सेवा शुरू हो गई। अब वहां पर 14 मरीज भर्ती हैं और उपचार करा रहे हैं।
जिला अस्पताल को सैनिटाइज कराया गया। अस्पताल में अब मरीजों को भर्ती की सुविधा शुरु हो गई है। बृहस्पतिवार को 14 मरीजों को पुरुष वार्ड में भर्ती कर उपचार शुरु किया गया है।
- डॉ. एसके वासवानी, मुख्य चिकित्सा अधिकारी