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लापरवाही : खुले पड़े पाइपलाइन के चैंबर, हो सकता है बड़ा हादसा

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- कहीं पटिया अलग पड़ी तो कहीं पर बगैर चैंबर के खुले पड़े वाल्व
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- समोगर मौजा में चैंबर में गिरकर मरी भैंस, किसान परेशान
अमर उजाला ब्यूरो
ललितपुर। जनपद में हर घर नल जल योजना के तहत गांवों के रास्तों को खोदकर डाली गई पाइपलाइनों के साथ बनाए गए चैंबरों में अधिकांश खुले पड़े हैं। आलम यह है कि कहीं डाली गई पटिया अलग पड़ी तो कहीं पर कमजोर पटिया टूट गई। हैरत कि बात तो यह है कि ग्राम पंचायत बालाबेहट में पाइपलाइन में वाल्व लगाकर चैंबर बनाए बगैर खुले में छोड़ दिए गए हैं। पेश है तीन ग्राम पंचायतों में खुले पड़े चैंबरों कि रिपोर्ट...।
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फोटो-28
दृश्य एक
ग्राम पंचायत अर्जुनखिरिया के मुख्य चौराहे नाट्याऊ के पास गांव के रास्ते पर एक साल पहले चैंबर बनाकर छोड़ दिया गया था, जिसे ढंकने के लिए पास में बनी पड़ी पटिया को आज तक नहीं ढंका गया है। स्थानीय लोग रात के अंधेरे में गिरकर चोटिल हो जाते हैं। शिकायत के बाद भी इस पर पटिया नहीं डलवाई गई है।
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फोटो-29
दृश्य दो
आयुष्मान केंद्र के सामने सड़क किनारे गड्ढा तो खोद दिया लेकिन चैंबर नहीं बनाया गया। इससे राहगीरों और वाहन चालकों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। ग्रामीणों ने बताया कि जामनी बांध से धौलपुरा और अर्जुन खिरिया तक बने कुछ चैंबरों में मिट्टी डाल दी गई, जिससे कोई उसे देख न सके।
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फोटो-30
दृश्य तीन
अर्जुन खिरिया गांव की मुख्य सड़क किनारे बना चैंबर काफी समय से खुला पड़ा है। ग्रामीणों का कहना है कि इस पर ढक्कन लगवाने के लिए कई बार कहा गया लेकिन कोई सुनवाई नहीं होती है। उनका कहना है कि रात के अंधेरे में कभी भी कोई बड़ा हादसा हो सकता है।
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फोटो-31
दृश्य चार
ग्राम पंचायत बालाबेहट में पाइपलाइन डालने के साथ चैंबर बनाने के लिए खोदे गए गड्ढों में वाल्व लगाकर छोड़ दिया गया। यहां न तो पक्के चैंबर बनाए गए और न ही वाल्व की सुरक्षा के लिए कोई अन्य व्यवस्था की गई। इसके चलते आए दिन पाइपलाइन टूटने से पेयजल सप्लाई प्रभावित होती है।
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फोटो-32
दृश्य-पांच
ग्राम पंचायत छपरट व समोगर में खुले पड़े चैंबर से ग्रामीण परेशान हैं। छपरट निवासी धनीराम की भैंस गांव में निकल गई थी। जानकारी पर उसने भैंंस को खोजा लेकिन पता नहीं चला। देर शाम मालूम हुआ कि मौजा समोगर में एक चैंबर में भैंस गिर गई तो वह मौके पर पहुंचा और भैंस निकालने की कोशिश की लेकिन उसने दम तोड़ दिया। 48 घंटे बाद भी उसका शव चैंबर में फंसा है।
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पानी की सप्लाई खोलने और बंद करने के लिए लगाए गए थे वाल्व
पाइपलाइन के साथ बनाए गए चैंबरों में वाल्व लगाए गए हैं, जिससे पानी की सप्लाई खोली और बंद की जा सकती है। पाइपलाइन क्षतिग्रस्त होने पर वाल्व से पानी रोककर बदली जा सकती है। इसके लिए ग्राम पंचायतों में पांच से सात चैंबर बनाए गए थे। इन चैंबर की गहराई चार से पांच फिट बताई जा रही है।
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फोटो-33
मुख्य चौराहे पर चैंबर खुला पड़ा है, इस रास्ते से बच्चे स्कूल आते जाते हैं। वहीं, गांव के लोग दोपहिया वाहनों से आटा चक्की व दुकानों के लिए इसी मार्ग से आवागमन करते हैं। ऐसे में हमेशा खतरा बना रहता है। -भूपेंद्र यादव, अर्जुन खिरिया
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फोटो-34
जल निगम वालों ने जामनी बांध से निकली पाइपलाइन में जितने चैंबर बने थे, उनको तो मिट्टी डालकर बंद कर दिया लेकिन इस गड्ढे को बंद नहीं किया। चौराहे पर खुला छोड़ दिया। जिससे कभी भी हादसा हो सकता है। -शिवम बुंदेला
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फोटो-35
मैने 80 हजार रुपये से भैंस खरीदी थी लेकिन अचानक छूटकर वह पड़ोसी गांव में बने चैंबर में गिर गई। जिससे उसकी मौत हो गई। काफी कोशिश के बाद भी भैंस का शव चैंबर से नहीं निकल पा रहा है। प्रशासन भैंस की मौत का मुआवजा दिलवाए। -धनीराम, भैंस मालिक निवासी छपरट
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जल जीवन मिशन के तहत यहां पक्के चैंबर बनाए गए थे, लेकिन इन पर पटिया न पड़ी होने से खुले पड़े हैं। हमारी ग्राम पंचायत में करीब सात चैंबर हैं, सभी खुले पड़े होने से खतरा रहता है। केसरबाई, ग्राम प्रधान छपरट
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वर्जन
पानी सप्लाई के लिए चैंबर बनाकर उनमें वाल्व लगाए गए हैं। इन चैंबरों पर ढक्कन लगाया गया था, जिसे लोग निकाल ले गए, जिस वजह से खुले होंगे। जानकारी लेकर दूसरे ढक्कन लगवाए जाएंगे।-अवनीश कुमार, अधिशासी अभियंता जल निगम
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