ललितपुर। नेटवर्कविहीन जिले के 22 दूरस्थ गांवों में अब मोबाइल की घंटी बजेगी। केंद्र सरकार ने इन गांवों में सरकारी जमीन पर बीएसएनएल के टावर लगाने की मंजूरी दे दी है। उपकरण पहुंच चुके हैं और छह माह में टावर स्थापित कर सेवा शुरू करने का लक्ष्य है। ये गांव जिले के छह विकासखंडों में हैं। इनमें आदिवासी बस्तियां भी शामिल हैं।
इन गांवों में किसी भी कंपनी का नेटवर्क नहीं होने से ग्रामीणों को मोबाइल फोन, इंटरनेट और ऑनलाइन भुगतान जैसी सुविधाओं के लिए परेशानी उठानी पड़ती है। परिषदीय स्कूलों में ऑनलाइन कार्य भी प्रभावित होते हैं। बीएसएनएल ने ऐसे गांवों को चिह्नित कर केंद्र सरकार को टावर लगाने का प्रस्ताव भेजा था। मंजूरी मिलने के बाद अब टावर लगाने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।
जिले में नेटवर्क का दायरा बढ़ाने के लिए बीएसएनएल ने पहले 81 स्थानों पर 169 टावर स्थापित किए हैं। इसके बावजूद कुछ गांव अब भी मोबाइल नेटवर्क से अछूते हैं। नए टावर लगने के बाद इन क्षेत्रों में बीएसएनएल की मोबाइल सेवा पहुंचने की उम्मीद है।
सोलर पैनल के साथ बिजली कनेक्शन, जरूरत पर जनरेटर
ग्रामीण क्षेत्रों में बिजली की समस्या के कारण टावर का संचालन प्रभावित न हो, इसके लिए नए टावरों पर सोलर पैनल लगाए जाएंगे। एसडीओ रमेश सिंह ने बताया कि टावरों के संचालन के लिए सोलर पैनल के साथ विद्युत कनेक्शन भी लिया जाएगा। जहां विद्युत लाइन उपलब्ध नहीं है, वहां वैकल्पिक व्यवस्था के तौर पर जनरेटर लगाया जाएगा। इससे बिजली आपूर्ति बाधित होने पर भी टावर का संचालन जारी रखने का प्रयास किया जाएगा।
इन गांवों में लगेंगे टावर
बंदरगुढ़ा, बरखिरिया, भारौन, देवगढ़, देवरी, रंपुरा, बम्हौरीबंसा, बड़ौदिया, दूधई, खजुरिया, भीकमपुर, पटना, पिपरिया, उल्दनाखुर्द, दौलतपुर, गुदरापुर, मानकपुर, रमगढ़ा, सतवांसा, सुनौमी, आल्हापुर (बांसी) और ककरेला।
देवगढ़ और रंपुरा में वन विभाग की एनओसी का पेच
विभागीय सूत्रों के मुताबिक देवगढ़ और रंपुरा में टावर लगाने के लिए वन विभाग की भूमि का मामला है। इन दोनों स्थानों पर टावर स्थापित करने से पहले वन विभाग से अनापत्ति प्रमाणपत्र (एनओसी) लेना होगा। एनओसी मिलने के बाद यहां टावर लगाने की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी।
बीएसएनएल की अन्य स्थिति
फाइबर कनेक्शन : 1,084
मोबाइल उपभोक्ता : करीब 58,000
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भारत सरकार से 22 गांवों में टावर लगाने की मंजूरी मिलने के साथ ही उपकरण पहुंचने शुरू हो गए हैं। ये टावर उन क्षेत्रों में लगाए जाएंगे, जहां किसी भी कंपनी का नेटवर्क उपलब्ध नहीं है। कोशिश है कि छह माह में टावर लगाने का काम पूरा कर इन क्षेत्रों में बीएसएनएल की सेवाएं शुरू कर दी जाएं। - एसके अहिरवार, मंडलीय अभियंता, बीएसएनएल