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मजदूर आस लगाए रहे, रॉक फास्फेट खदानों पर कुछ भी नहीं बोले योगी

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Yogi_Adityanath.jpg - फोटो : Yogi_Adityanath.jpg
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ललितपुर। बंडई बांध के ठीक नीचे 700 की आबादी वाला गांव टोरी बसा हुआ है। इसी गांव में स्थित है खनन विभाग की एक लंबी चौड़ी कालोनी जो अब वीरान हो चुकी है। इसमें एक अधिकारी और चपरासी के अलावा कोई नहीं रहता। इसी के बीचोबीच मैदान में मंगलवार को मुख्यमंत्री की सभा थी। गांव के लोगों को उम्मीद थी कि खाद बनाने के काम में आने वाले रॉक फॉस्फेट के खनन के लिए काम करने वाले कर्मचारी और मजदूरों की यह कालोनी मुख्यमंत्री की सभा के बाद शायद आबाद हो जाएगी और बेरोजगार हुए हजारों मजदूरों की रोजी रोटी गुलजार हो जाएगी। पर मुख्यमंत्री इस कालोनी के आंगन में सभा तो कर गए लेकिन न तो उन्होंने रॉक फॉस्फेट की खदानों का जिक्र किया और न ही कालोनी का। सीएम की हर घोषणा के बाद टोरी गांव के लोगों को लगा कि अब शायद योगी जी उनके मन की मुराद पूरी करेंगे पर ऐसा नहीं हुआ।
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टोरी गांव के इस रॉक फॉस्फेट उद्योग के 40 साल पीछे इतिहास की ओर जाते हैं तो हमें जानकारी मिलती है कि 1981 में जिले में रॉक फॉस्फेट की खदानें शुरू की गई थीं। खाद में काम आने वाले रॉक फॉस्फेट को उद्योग के रूप में विकसित करने के उद्देश्य से एक बड़ी कालोनी का निर्माण किया गया था। इसमें खनन विभाग के अधिकारी, कर्मचारी व हजारों की संख्या में मजदूर रहकर अपनी रोजी रोटी चलाते थे। 1998 में इन खदानों को सरकार ने अचानक बंद कर दिया और कर्मचारियों को वीआरएस देकर बेरोजगार कर दिया। खदानों पर काम करने वाले हजारों मजदूर रोजी रोटी के लिए मोहताज हो गए थे। अभी एक बार फिर सत्ताधारी दल के मंत्री और विधायकों ने गांव के लोगों को भरोसा दिया था कि मुख्यमंत्री बंडई बांध के लोकार्पण समारोह में रॉक फॉस्फेट की खदानों के शुरू करने का ऐलान कर सकते हैं, पर ऐसा नहीं हुआ और ग्रामीणों को सिर्फ मायूसी ही हाथ लगी। टोरी गांव के निवासी कुंदन सिंह कभी खनन विभाग में ही कर्मचारी थे, वे भी सभा में पहुंचे थे। उन्होंने बताया कि उन्हें वीआरएस दे दिया गया था तब से उनके सामने रोजी रोटी का संकट है।
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