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सहरिया आदिवासियों की आवाज नहीं बन सके राज्यमंत्री

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ललितपुर। प्रदेश सरकार के श्रम और सेवायोजन राज्यमंत्री मनोहरलाल पंथ अब तक कमजोर वर्ग की आवाज नहीं बन सके हैं। जिस धौर्रा गांव से उनका नाता है, उसमें सहरिया आदिवासियों की अनगिनत समस्याएं हैं। किसी को सस्ता राशन नहीं मिल रहा है तो कोई पेयजल एवं आवास के लिए परेशान है। पानी की समस्या इतनी विकट है कि यहां के लोगों ने शौचालय का उपयोग करना बंद कर दिया है। कुछ लोग तो शौचालय में अपनी गृहस्थी का सामान रखे हैं।
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ब्लाक बिरधा अंतर्गत ग्राम धौर्रा इमारती पत्थर के खनन के लिए पहचाना जाता है। वर्तमान में यहां अनापत्ति प्रमाण पत्र के अभाव में दो दर्जन से अधिक खदानें बंद चल रही हैं, जिससे लोगों को रोजगार के लिए यहां-वहां भटकना पड़ रहा है। गांव के मुख्य बाजार में वर्षों पहले डाली गई सीसी सड़क में जगह-जगह छोटे-छोटे गड्ढे उभर आए हैं। यहां की नालियों पर लोगों ने पक्के चबूतरे बना लिए हैं, इस कारण नालियों की सफाई नहीं हो पा रही है। बरसात के दिनों में पानी सड़क पर जमा हो जाता है। कुछ नालियां अस्त-व्यस्त होने से गंदा पानी इधर-उधर बह रहा है।
बाजार के पास पक्का कुआं है, जो अब कचरा घर बन गया है। सबसे ज्यादा समस्या सहरिया बस्ती में है, जहां लोग बुनियादी सुविधाओं के लिए परेशान हैं। पिपराबांसा परियोजना क्षेत्र के कई गांवों की प्यास बुझाती थी जो अब हांफ रही है। टंकी से आपूर्ति अनियमित बनी हुई है। सहरिया बस्ती के लोगों को एक किलोमीटर की दूरी से पानी भरना पड़ता है। कइयों को अब तक प्रधानमंत्री आवास योजना का लाभ नहीं मिल पाया है। ऐसे लोग कच्चे मकानों में रहने के लिए मजबूर हैं। लोगों के घरों में शौचालयों का निर्माण हो गया है। इसके निर्माण में मनमानी बरती गई है। गड्ढों को मानक अनुरूप नहीं बनाया गया है। पानी की समस्या के चलते अधिकतर लोगों ने शौचालयों का उपयोग बंद कर दिया है। कुछ लोगों ने तो शौचालयों में अपनी गृहस्थी का सामान रखना शुरू कर दिया है।
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जिला पंचायत ने कांजी हाउस गो आश्रय स्थल का निर्माण कराया है, लेकिन उसमें पशु एक भी बंद नहीं हैं। सुखनंदन के मकान से कपासी तिगैला की ओर सीसी निर्माण अधूरा है। इस मार्ग पर जगह-जगह कचरा पसरा है। नाली भी सफाई के अभाव में बजबजा रही हैं। परिषदीय विद्यालयों की शिक्षा शिक्षक व शिक्षिकाओं की मनमानी का शिकार हो गई है। कुल मिलाकर ग्राम धौर्रा की व्यवस्था देखकर यह कह सकते हैं कि राज्यमंत्री अपने ही गांव के विकास पर ध्यान केंद्रित नहीं कर पा रहे हैं, जिसका खामियाजा गांव के लोगों को भुगतना पड़ रहा है।
ग्राम धौर्रा सहित आसपास के कई गांवों में पेयजल की समस्या है। पिपरिया चौराहे पर एक ही हैंडपंप लगा है, जबकि यहां लोग बड़ी संख्या में बैठकर आने-जाने का साधन तलाशते हैं। शौचालयों के निर्माण में भारी गड़बड़ी बरती गई है।
- राजेश कुमार यादव
दो साल पहले आवास के लिए फार्म भरा था, लेकिन उसका आवास अब तक स्वीकृत नहीं हो सका है। शौचालय निर्माण के लिए नौ हजार रुपये की किस्त मिली, उसके उपरांत अगली किस्त नहीं दी गई है। इससे शौचालय पूर्ण नहीं हो पा रहा है।
- सुकनंदन
मोहल्ले की नाली चोक है, इससे नाली से दुर्गंध उठती है। वहीं, पीने के पानी की भी परेशानी है। हैंडपंप का पानी घर के लिए उपयोग करते हैं।
- सुशीला
आठ दिन में एक दिन पाइप लाइन से पानी मिलता है। इस कारण दो किलोमीटर की दूरी से पानी भरना पड़ता है। पानी ढोते- ढोते सिर भी कांपने लगता है। पानी की समस्या बहुत विकट है, जिसे कोई निस्तारित नहीं कर रहा है।
- काशीबाई
मैन सड़क को सीसी सड़क में बदल दिया है, लेकिन अंदर के रास्ते या तो कच्चे हैं या फिर खडंजा डला है। बस्ती के अंदर के विकास की ओर कोई ध्यान नहीं दे रहा है।
- भगवान सिंह
पहले सस्ता राशन मिलता था, लेकिन किसी ने सूची से नाम कटवा दिया या कट गया। इससे राशन मिलना बंद हो गया है। तीन माह से कोई राशन नहीं मिला है। ऑनलाइन फार्म जमा किया तो भी कोई कार्रवाई नहीं की जा रही है। आवास भी नहीं मिला है। बड़े लोगों की ही सुनवाई हो रही है।
- उमा
सरकारी योजनाओं का लाभ लेने के लिए फार्म तो भरा लिए जाते हैं, लेकिन लाभ किसी योजना का नहीं मिलता है। सहरियों की कोई सुनने वाला नहीं है। बस्ती में कोई भी अधिकारी समस्या जानने के लिए नहीं आता है।
- बहादुर
पूप्र सर्दी के सीजन में पानी का इंतजाम साइकिल पर कुप्पा बांधकर किया है। अब गर्मी आ रही है तो समस्या और भी कठिन होने वाली है, यह चिंता दिन रात बनी रहती है।
- राजा
प्रधानमंत्री आवास योजना का लाभ नहीं मिल रहा है। शौचालय का निर्माण कराया गया है, लेकिन उसमें पानी डालने के लिए समस्या है। पानी बहुत दूरी से ढोकर लाना पड़ता है। कोई यहां की समस्याएं देखने भी नहीं आता है।
- बादाम
पानी की समस्या का हल तब निकलेगा, जब जल संस्थान अपने कर्मियों को नियमित करे। शिक्षा के लिए गांव में अटल आवासीय स्कूल स्वीकृत हो गया है। वहीं, इंटर कॉलेज के भवन का काम लग गया है। हालांकि, उच्च शिक्षा की अभी कमी है। परिषदीय विद्यालयों में तैनात शिक्षक और शिक्षिकाएं भोपाल व अन्य जिलों से आते हैं, जिसकी कई बार शिकायत कर चुके हैं, लेकिन कोई हल नहीं निकला है। गांव में केवल एक सफाई कर्मचारी है।
- बबीता मिश्रा, ग्राम प्रधान, धौर्रा
पेयजल की व्यवस्था के लिए हर घर नल योजना स्वीकृत हो गई है। सड़कों का निर्माण कराया जा रहा है। सहरिया बस्ती में देवी मंदिर तक सड़क बनी है। खदानें चालू होने पर रोजगार की व्यवस्था हो जाएगी। इनके संचालन की प्रक्रिया आरंभ हो गई है।
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- मनोहरलाल पंथ, श्रम एवं सेवायोजन राज्यमंत्री, उत्तर प्रदेश शासन
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