ललितपुर। करोड़ों रुपये का राजस्व देने वाली मंडी में किसानों के लिए सुविधाओं का टोटा है। आलम यह है कि दूर दराज से फसल को बेचने मंडी आने वाले किसानों को पेयजल तक के लिए भटकना पड़ रहा है। हालात यह हैं कि मंडी में अधिकांश टंकियां सूखी पड़ी हैं और टोटियां गायब हो चुकी हैं। इसके अलावा बड़ी संख्या मेें हैंडपंप खराब पड़े हैं। मंडी में आढ़ती, किसानों व पल्लेदारों सहित करीब 10 हजार लोग दिनभर रहते हैं, लेकिन गर्मी में पानी की समस्या इनके लिए आफत बन रही है। यह हालात तब हैं जब डीएम आलोक सिंह लगातार पेयजल व्यवस्था की समीक्षा कर रहे हैं।
नवीन गल्ला मंडी में शौचालयों और किसान विश्राम गृह में ताला पड़ा हुआ है। ऐसे में किसान कहीं पेड़ की छांव, तो कहीं टिन शेड के नीचे वक्त गुजारते हैं। वहीं तमाम किसान धूप में खड़े रहने को मजबूर हैं। वहीं मौजूदा समय में मंडी में जाम की समस्या गहराती जा रही है। मंडी में नीलामी चबूतरों पर माल नहीं उतारा जा रहा है। माल सड़क पर उतारे जाने से वाहनों की आवाजाही नहीं हो पा रही है। मगर लोगों की परेशानी दूर करने में जिम्मेदार ध्यान नहीं दे रहे हैं। यहां पर पीछे का गेट खुलने से वाहनों को तो सुविधा मिलेगी, लेकिन सड़क पर व्यापार कम हो जाएगा। इसके चलते ही मंडी का पीछे का गेट तक नहीं खोला जा रहा है।
बंद पड़ा किसान विश्राम गृह
शासन द्वारा भले ही किसानों को सुविधा मुहैया कराने के दावे किए जा रहे हों, लेकिन हकीकत कुछ और ही है। मंडी में उपज बेचने आ रहे किसानों के बैठने के लिए विश्राम गृह बना है। इसमें पंखा और तख्त डलवाए गए थे, लेकिन अनदेखी के चलते किसान विश्राम गृह बंद पड़ा है।
शौचालय पर भी लटका ताला
गल्ला मंडी में किसानों के प्रसाधन के लिए बनाए गए सुलभ शौचालय का भी किसान लाभ नहीं ले पा रहे हैं। यहां भी ताला लटका हुआ है। ऐसे में किसानों को प्रसाधन के लिए परेशान होना पड़ रहा है।