ललितपुर। रबी फसलों में मौसम परिवर्तन के कारण कीट और रोगों का प्रकोप होने लगा है। किसान फसलों को कीड़ों के नुकसान से बचाने लिए कीटनाशक दवाओं का प्रयोग कर रहे हैं। राजस्थान में टिड्डी का प्रकोप फैल रहा है, वह बुंदेलखंड में भी हमला कर सकती है। इसलिए फसल को बचाने के लिए जागरूक रहने की जरूरत है। टिड्डीयों को भगाने एवं नियंत्रित करने के लिए थालियां, ढोल, नगाड़े, लाउडस्पीकर या अन्य माध्यमों से शोर गुल करना चाहिए, क्योंकि यह शोर सुनकर भाग जाती हैं।
मौसम बदलने के कारण रबी की फसलों में चना, मटर और मसूर में सेमीलूपर (इल्ली), कटुआ कीट और फली भेदक का प्रकोप बढ़ गया है। इनसे बचाव के लिए क्यूनालफास 25 प्रतिशत ईसी 1 5 लीटर या प्रोफेनोफास एक लीटर मात्रा या 2.5 लीटर नीम तेल (एजाडीरेक्टीन) को 500-600 लीटर पानी में घोलकर छिड़काव करने से कीटों का प्रकोप नहीं हो पाता है। राई/ सरसों, मसूर, मटर एवं चना में माहू के नियंत्रण के लिए डाईमिथोएट 30 ईसी या इमिडाक्लोप्रिड 17.8 प्रतिशत एसएल की 250 से 300 एमएल मात्रा को 500-600 लीटर पानी में घोलकर प्रति हेक्टेयर की दर से छिडकाव करें।
प्रदेश से लगे सीमावर्ती राज्यों राजस्थान, पंजाब एवं हरियाणा आदि में फसलों को नुकसान पहुंचाने वाला मुुख्य कीट टिड्डी का प्रकोप काफी फैल रहा है। यह टिड्डी बुंदेलखंड की फसलों पर भी हमला कर सकता है, इसलिए इससे सतर्क रहने की जरूरत है। मादा टिड्डी मिट्टी 20 से 100 अंडे तक रखती है तथा 10 से 20 दिनों में अंडे फूट जाते हैं और झुंड में हो जाते हैं। टिड्डी जब अकेली होती है तो उतनी खतरनाक नहीं होती, लेकिन झुंड में रहने पर बहुत खतरनाक और आक्रामक हो जाती है। यह फसलों का एक बार में सफाया कर देती है। यह फसल के फूल, फल, पत्ते, तने, बीज और पेड की छाल सब कुछ खा जातीं हैं।
टिड्डी दल सुबह 10 बजे के आद अपना डेरा बदलता है। इसलिए इसे आगे बढने से रोकने के लिए लैंडा सायहेलोथ्रिन 5 प्रतिशत ईसी की एक लीटर मात्रा या क्लोरोपाइरिफास 20 प्रतिशत ईसी की एक लीटर मात्रा को 500 से 600 लीटर पानी में घोलकर प्रति हक्टेयर की दर से फसल पर छिडकाव करना चाहिए। नीम के तेल की 40 एमएल मात्रा को 10 ग्राम कपडे धोने के पाउडर के साथ मिलाकर टंकी की पानी में डालकर छिडकाव करने से टिड्डी फसलों को नहीं खा पाती है। फसल की कटाई के बाद मई और जून में खेत की गहरी जुताई करने से सूर्य की तेज किरणों से जमीन में पड़े कीटों केे अंडे व प्यूपा नष्ट को जाते हैं।
मौसम परिवर्तन के कारण रबी की फसलों पर कीट एवं रोगों का प्रकोप होने लगा है। कीड़ों से फसलों को बचाने के लिए कीटनाशक का प्रयोग करें। किसान यदि जागरूक रहेगा तो फसलों को नुकसान नहीं होगा।
- गौरव यादव
जिला कृषि रक्षा अधिकारी