पहले छूटा मायका, अब छूटेगा साक्षरता मिशन का साथ
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ललितपुर। साक्षर भारत मिशन से जुड़ी शादीशुदा महिला प्रेरकों की छुट्टी कभी भी हो सकती है। शासन ने ऐसे प्रेरकों के प्रति अपनी नजरें टेढ़ी कर ली हैं। उन्होंने महिला प्रेरकों की उपस्थिति प्रमाणित कराने के निर्देश ग्राम प्रधान एवं साक्षरता सचिव को दिए हैं।
पंद्रह वर्ष की आयु वर्ग के युवक-युवतियों को ककहरा सिखाने के लिए साक्षर भारत मिशन चलाया जा रहा है, इसके तहत प्रत्येक ग्राम पंचायत में एक पुरुष व एक महिला प्रेरक की तैनाती की गई है। कई महिला प्रेरकों की शादी अन्य जनपद या फिर मध्यप्रदेश के जिलों में हो गई है। इसका विपरीत असर साक्षर भारत मिशन पर दिखाई दे रहा है। कई ग्राम पंचायतों में महिला प्रेरक काम नहीं कर रहीं हैं। इसे शासन ने संज्ञान में लेकर उनकी उपस्थिति ग्राम प्रधान एवं लोक शिक्षा केंद्र के सचिव से प्रमाणित कराने के निर्देश दिए हैं।
विभागीय अफसरों का मानना है कि कई महिला प्रेरकों की शादी अन्य जिलों में हो गई है, जिस कारण न तो वह ग्राम में निवास कर रही हैं और न ही अभियान का काम कर रही हैं। ऐसे प्रेरकों को चिह्नित कर उनकी जगह अन्य महिला प्रेरकों की तैनाती की जाएगी।
कई ग्राम पंचायतों में कम पड़े प्रेरक
जिले की कई ग्राम पंचायतों में प्रेरकों की संख्या कम पड़ गई है। इसकी वजह कई प्रेरकों ने या तो मानदेय के अभाव में काम छोड़ दिया है या फिर अन्य कोई मनमाफिक काम मिल गया है। ऐसे में ग्राम पंचायतों में भी प्रेरकों की कमी महसूस की जा रही है।
नवीनीकरण का रास्ता साफ
साक्षरता, वैकल्पिक शिक्षा एवं सचिव राज्य साक्षरता मिशन प्राधिकरण के निदेशक अवध नरेश शर्मा ने जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी को पत्र जारी कर प्रेरकों के नवीनीकरण के निर्देश दिए हैं। उन्होंने बीएसए को लिखे पत्र में कहा कि सभी प्रेरको के कार्य एवं सौंपे गए उत्तरदायित्व की समीक्षा करते हुए नवीनीकरण की कार्रवाई प्रारंभ की जाए, जिससे प्रेरकों के नवीनीकरण का रास्ता साफ हो गया है।