ललितपुर। पढ़ाई की कोई उम्र नहीं होती। उम्र के जिस पड़ाव में अपने साथ छोड़ने लगते हैं उस पड़ाव में जनपद के बुजुर्गों ने शिक्षा को सहारा बनाया। रविवार को जिले के 116 परीक्षा केंद्रों पर हाथ में कलम और लाठी थामकर परीक्षा देने पहुंचे बुजुर्ग परीक्षा में 921 नवसाक्षर शामिल हुए। दादा-दादी और काका-काकी ने शिक्षा की अलख जगाई।
निरक्षरों को साक्षर बनाने के लिए नवभारत साक्षरता अभियान चलाया जा रहा है। जिसमें हिंदी, गणित, मात्रा ज्ञान, स्वर परिचय, आओ बनाएं शब्द, गिनती, संख्या ज्ञान, गुणा-भाग, जोड़-घटना सिखाकर साक्षर किया गया। साक्षरता परीक्षा रविवार को कराई गई। यह परीक्षा 116 विद्यालयों में सुबह दस बजे से शुरू हुई। केंद्रों पर सुबह से ही बुजुर्ग और महिलाएं हाथ में कलम लेकर पहुंचे। यहां शिक्षक-शिक्षिकाें ने उन्हें पहले प्रश्नपत्र दिया। जिसके बाद उन्होंने प्रश्नों को हल किया।
परीक्षा में 918 पंजीकृत के सापेक्ष 921 नवसाक्षर उपस्थित रहे। इनमें तीन नव साक्षर ऐसे रहे थे जोकि परीक्षा केंद्र पर आ गए थे और उनका केंद्र पर ही एनआईओएस फार्म भरकर परीक्षा में शामिल कराया गया। नवसाक्षर परीक्षा देने वालों में महिलाओं की संख्या अधिक थी। ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाएं अपने घर के बुजुर्गों के साथ परीक्षा देने आई। महिलाओं ने परीक्षा कक्ष में घूंघट की ओट में सवाल हल किए। परीक्षा देने के बाद सभी नवसाक्षर काफी खुश दिखाई दिए।
जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी रणवीर सिंह ने बताया कि साक्षरता कार्यक्रम के तहत नवसाक्षरों की परीक्षा रविवार को 116 विद्यालयों में हुई। परीक्षा में 921 नव साक्षरों ने परीक्षा दी। परीक्षा शांतिपूर्ण परीक्षा तरीके से कराई गई।