ललितपुर। फीडरों पर काम करने के दौरान कई लाइनमैन पहले भी अपनी जान गवां चुके हैं, जबकि कई अपंग भी हुए। उनका परिवार पाई-पाई को मोहताज है, लेकिन विभाग ने कई को तो अब तक कोई मदद भी नहीं दी। खंभों पर चढ़कर तारों की मरम्मत करने वाले कर्मियों को पर्याप्त जरूरी सुरक्षा उपकरण भी नहीं उपलब्ध कराए जा रहे हैं।
बालाबेहट के ग्राम मुडारी निवासी राकेश विश्वकर्मा लाइनमैन था। मंगलवार रात में शटडाउन लेकर वह बालाबेहट फीडर पर पेट्रोल पंप के पास हाईटेंशन लाइन के खंभे पर चढ़कर काम कर रहा था। इसी दौरान अचानक लाइन में करंट दौड़ गया और वह बुरी तरह झुलस गया। कुछ ही देर में उसकी मौत हो गई। शटडाउन लेने के बाद भी करंट आने पर हर लाइनमैन के मन में सवाल है कि आखिर किसकी लापरवाही से एक कर्मचारी की जान चली गई।
वैसे, यह एक मामला नहीं है, बल्कि पहले भी विभागीय लापरवाही के कारण कई लाइनमैन या संविदा कर्मियों को अपनी जान गंवानी पड़ी है, जिनकी विभागीय जांच भी ठंडे बस्ते में चली गई। यह भी पता नहीं चल सका कि वास्तव में गलती किसकी थी। इन मौतों के जिम्मेदारों पर कोई कार्रवाई भी नहीं हो सकी और न ही जान गंवाने वाले लाइनमैन या अन्य कर्मचारियों को अब तक इंसाफ मिल सका।