ललितपुर। अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश (पॉक्सो एक्ट) चंद्रमोहन श्रीवास्तव की अदालत ने कोतवाली तालबेहट अंतर्गत एक गांव में चोरी के उद्देश्य से घर में घुसकर किशोरी से दुष्कर्म के दो वर्ष पुराने मामले में आरोपी को दोषी पाते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। उस पर 63 हजार रुपये अर्थदंड भी लगाया गया है।
कोतवाली तालबेहट क्षेत्र के एक गांव निवासी व्यक्ति ने सात सितंबर 2019 को कोतवाली तालबेहट में तहरीर देकर बताया कि छह सितंबर को वह अपने परिवार सहित खेत पर गया था। घर उसकी 13 वर्षीय बेटी अकेली थी। इसी बीच सुबह करीब साढ़े दस बजे एक युवक उसके घर में घुुस गया। उस व्यक्ति ने घर के अंदर की कुंडी बंद करके उसकी बेटी के मुंह में कपड़ा ठूंसकर व हाथ पांव बांधकर उसके साथ दुष्कर्म किया। इसके बाद बेटी बेहोश हो गई। आरोपी दूसरे कमरे में रखे करीब 60 हजार के जेवरात व 16 हजार रुपये उठाकर बाहर की कुंडी बंद कर भाग गया।
पिता की तहरीर पर पुलिस ने अज्ञात आरोपी के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज की थी। विवेचना में किशोरी से दुष्कर्म और चोरी किए जाने की घटना में झांसी के मऊरानीपुर के मोहल्ला अलयाई निवासी आकाश अग्रवाल का नाम प्रकाश में आया। पुलिस ने आरोपी को पांच अक्तूबर को तेरई फाटक से गिरफ्तार कर उसके पास से तमंचा और चार कारतूस के अलावा सोने व चांदी के जेवरात बरामद किए थे। पुलिस ने न्यायालय में आरोप पत्र दाखिल किया।
इसमें विशेष अधिवक्ता (विशेष लोक अभियोजक) नरेंद्र पाल गौर ने बताया कि मंगलवार को न्यायालय ने अभियोजन पक्ष की ओर से पेश की गई दलीलों, साक्ष्यों व गवाहों के आधार पर सुनवाई करते हुए न्यायाधीश ने किशोरी के साथ दुष्कर्म करने का दोषी पाते वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से अभियुक्त को आजीवन कारावास (जो शेष प्राकृत जीवनकाल तक के लिए कारावास होगा) की सजा सुनाई।
इसके अलावा 50 हजार रुपये अर्थदंड भी लगाया। वहीं चोरी के मामले में दोषी पाए जाने पर पांच वर्ष का कारावास की सजा दी। इसमें भी पांच हजार रुपये अर्थदंड लगाया। वहीं, चोरी का सामान बरामद होने में दो वर्ष का कारावास की सजा दी। एवं तीन हजार रुपये अर्थदंड लगाया।
जबकि धारा 452 में पांच वर्ष की सजा सुनाई एवं पांच हजार रुपये अर्थदंड लगाया। इस प्रकार उसे आजीवन कारावास की सजा दी गई। इसके अलावा 63 हजार रुपये अर्थदंड लगाया। अर्थदंड अदा न करने पर एक वर्ष का अतिरिक्त कारावास भी भुगतना होगा। वहीं न्यायालय ने पीड़िता को प्रतिकर दिलाए जाने के लिए निर्णय की प्रति जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के सचिव को भेजने का आदेश भी दिया।