- जनपद की दालें कई प्रदेशों में की जाती हैं पसंद
संवाद न्यूज एजेंसी
ललितपुर। जिले में प्रमुख रूप से दलहनी फसलों में मूंग, उड़द, मसूर व चना का उत्पादन होता है। दलहनी फसलों की दाल बनाने के लिए जिले में 15 से अधिक मिलों का संचालन हो रहा है। इन मिलों से तैयार दाल दिल्ली, कोलकाता, महाराष्ट्र, गुजरात के अलावा तमिलनाडु तक जाती है। सबसे ज्यादा जनपद में उड़द का उत्पादन होता है, जो कई प्रांतों में पसंद की जाती है।
जनपद का प्रमुख व्यवसाय खेती है, यहां पर दलहनी फसलों का उत्पादन काफी अच्छा होता है। खरीफ की फसल में तो जिले के अधिकांश कृषि क्षेत्रफल में उड़द की फसल की बोई जाती है। यहां से देश के विभिन्न प्रांतों के जिलों में दाल भेजी जाती है। यहां पर दालों की विशेष डिमांड तमिलनाडु, बंगाल व उड़ीसा से आती है। इनके क्षेत्रों के अलावा गुजरात, महाराष्ट्र व कर्नाटक आदि प्रांतों में भी जिले की दाल विशेष पसंद की जाती है। उद्यमियों की मानें तो शादी के सीजन में कोलकाता व मद्रास की इतनी डिमांड बढ़ जाती है कि इसकी आपूर्ति करना मुश्किल हो जाता है।
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साउथ इंडियन व्यंजनों में उपयोग होती है उड़द की दाल
जिले में उड़द का उत्पादन अधिक होता है, इस दाल का प्रयोग साउथ इंडियन व्यंजनों में किया जाता है। जिससे वहां पर इसकी अधिक मांग होती है। उत्तर भारत में उड़द उत्पादन काफी अधिक होता है, जिसमें जनपद का अपना प्रमुख स्थान है। यही कारण है कि यहां की दालें दक्षिण भारत के प्रांतों में पसंद की जाती हैं।
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यहां की दाल कई जगहों पर पसंद की जा रही है, सरकार को इसके उत्पादन को बढ़ावा देना चाहिए। इसके अलावा दाल उद्योग को बढ़ावा देने के लिए सरकार को कारगर कदम उठाना चाहिए।
मुकेश जैन, अध्यक्ष जिला स्मॉल स्केल इंडस्ट्रीज
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जिले में दाल व्यवसाय को बढ़ावा देने के लिए कारगर कदम उठाने चाहिए, यहां पर नैफैड जैसी संस्थाएं बिचौलियों से दालें खरीदकर जा रही हैं, जिससे किसानों को लाभ नहीं मिल रहा है। साथ ही मिल मालिकों को भी पर्याप्त दलहनी फसलें नहीं मिल पाती हैं।
नीतेश जैन, महामंत्री जिला स्मॉल स्केल इंडस्ट्रीज