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Lalitpur: भगवान विष्णु का धन तिजोरी में बंद, 12 साल से खर्च का इंतजार, सरकारी खजाने में कैद हैं 1.03 करोड़

Wed, 18 Feb 2026 03:23 PM IST
दीपक महाजन अमर उजाला नेटवर्क, झांसी

सार

धनराशि के उपयोग के लिए अब तक मंदिर प्रबंधन समिति का गठन ही नहीं हो सका। यही वजह है कि नियमों के तहत राशि खर्च करने की प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ पाई।
 
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चिगलौआ स्थित विष्णु मंदिर - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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भगवान विष्णु के नाम पर जमा बड़ी रकम वर्षों से उपयोग के इंतजार में है। चिगलौआ स्थित विष्णु मंदिर की 1.03 करोड़ रुपये की राशि पिछले 12 वर्षों से सरकारी खजाने में जमा है, लेकिन अब तक इसका उपयोग न तो मंदिर के संरक्षण में हो सका और न ही किसी धार्मिक या जनकल्याणकारी कार्य में। इस धनराशि के उपयोग के लिए अब तक मंदिर प्रबंधन समिति का गठन ही नहीं हो सका। यही वजह है कि नियमों के तहत राशि खर्च करने की प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ पाई।
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जिला मुख्यालय से करीब 40 किमी दूर स्थित गांव चिगलौआ में भगवान विष्णु मंदिर की अधिगृहित की गई 3.710 हेक्टेयर जमीन के मुआवजे की राशि करीब 1.03 करोड़ रुपये सरकारी खजाने में जमा है। बजाज पवार प्लांट की स्थापना के समय विष्णु मंदिर की भूमि अधिगृहीत की गई थी। प्लांट के लिए रेल लाइन, नाला व सड़क निर्माण के गाटा संख्या 2338 मिल जुमला नंबर का 3.710 हेक्टेयर जमीन अधिग्रहण की गई थी। जिसके एवज में एक करोड़ तीन लाख 44 हजार 835 रुपये की धनराशि वर्ष 2014 में दी गई। इसमें रेल लाइन निर्माण में 1.350 हेक्टेयर भूमि ली गई थी, जिसका 28 लाख 56 हजार 537 रुपये मुआवजा दिया गया। साथ ही भूमि पर खड़े पेड़ों के लिए 16 हजार 383 रुपये व पुनर्वास योजना के तहत पावर कंपनी की ओर से 9 लाख 20 हजार 364 रुपये का भुगतान किया गया। दूसरी रकवा नाला निर्माण के 0.700 हेक्टेयर लिया गया गया, जिसका मुआवजा 14 लाख 44 हजार 363 रुपये दिया गया, इस भूमि खड़े फलदार व अन्य वृक्षों के एवज में 10 हजार 316 रुपये, पुनर्वास योजना में 4 लाख 77 हजार 397 रुपये भुगतान किया गया। सड़क निर्माण के लिए 1.660 हेक्टेयर भूमि अधिग्रहण की गई, जिसका मुआवजा 34 लाख 83 हजार 551 रुपये, फलदार व अन्य पेड़ों के 38 हजार 48 रुपये व पुनर्वास योजना में कंपनी ने 11 लाख 32 हजार 113 रुपये भुगतान किया। मंदिर समिति पंजीकृत नहीं होने की वजह से यह धनराशि जिला प्रशासन के पीएलए (पर्सनल लेजर एकाउंट) में जमा कर दिया गया। तब से इस पैसे का उपयोग मंदिर के लिए नहीं हो सका है। फिलहाल मंदिर में पूजा पाठ के लिए पुजारी गणेश कौशिक व एक हेल्पर के साथ प्रसाद व रखरखाव पर होने वाला व्यय पावर प्लांट प्रबंधन की ओर से किया जा रहा है।


57 एकड़ जमीन में 25 एकड़ का ही जमा होता है 2 से 3 लाख रुपये प्रतिवर्ष
जानकारी के मुताबिक मंदिर की चिगलौआ गांव में 25 एकड़ जमीन पर खेती की जाती है। इससे प्रतिवर्ष करीब दो से तीन लाख रुपये मिलता है जो महरौनी तहसीलदार की निगरानी में सरकारी कोष में जमा किया जाता है जबकि उदयपुरा में 22 एकड़ जमीन व मिर्चवारा में करीब 10 एकड़ जमीन पर असरदार लोग खेती करा रहे हैं। उनका दावा है कि इस खेती से मिलने वाला पैसा गांव में आयोजित होने वाले धार्मिक कार्यक्रमों पर खर्च किया जाता है। हैरत की बात तो यह है कि इस जमीन को लेकर अब तक प्रशासनिक कार्रवाई नहीं की गई है।
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ऐसे मिली थी भगवान विष्णु की प्राचीन मूर्ति
चिगलौआ गांव बुजुर्ग राजाराम गोस्वामी बताते हैं कि जिस स्थान पर आज भव्य मंदिर बना है वहां पहले जंगल था। एक दिन चरवाहों ने वहां स्थित टीले पर पत्थर से कुल्हाड़ी को घिसा तो पत्थर तेज चमकने लगा। उन लोगों ने समझा कि यह दुर्गा माता की मूर्ति है। दूसरे दिन ग्रामीणों ने वहां जाकर खुदाई शुरू की तो उस जगह पर भगवान विष्णु, कार्तिकेय एवं गणेश की मूर्तियां निकलीं। तत्कालीन ग्राम प्रधान मेहरवान सिंह ने वर्ष 1967-68 में करीब 25 एकड़ जमीन मंदिर के नाम पट्टा करा दिया था। वर्ष 1970 में हरियाणा निवासी त्यागी महाराज का आगमन उस मंदिर पर हुआ और भजन कीर्तन होने लगा। वर्ष 1981-82 में मंदिर से भगवान कार्तिक एवं गणेश की प्रतिमाएं चोरी हो गईं जिन्हें पुलिस के अथक प्रयास से बरामद कर लिया और सन् 1995-96 में कोर्ट के आदेश पर मूर्तियों को गांव वालों के सुपुर्द कर दिया गया जिन्हें विधिविधान से मंदिर में स्थापित करा दिया गया। ग्राम प्रधान करतार सिंह यादव ने बताया कि विष्णु भगवान मंदिर बहुत ही सुंदर बना है। गांव वाले हर त्योहार पर यहां धार्मिक कार्यक्रम करते हैं।


मंदिर की जमीन पर बने विद्या का मंदिर
मिर्चवारा में मंदिर की करीब 10 एकड़ जमीन पर विद्या का मंदिर (डिग्री कॉलेज) बन जाए तो आसपास गांवों के विद्यार्थियों को उच्च शिक्षा के लिए इधर-उधर जाना नहीं पड़ेगा। - राजाराम गोस्वामी

मंदिर की जमीन पर राजकीय डिग्री कॉलेज बन जाए तो क्षेत्र में उच्च शिक्षा का स्तर सुधरेगा, इस संबंध में पहले प्रयास किए गए थे लेकिन सफलता नहीं मिल सकी। - डॉ. ओमप्रकाश शास्त्री, प्राचार्य, नेहरू महाविद्यालय, ललितपुर

मंदिर में विराजमान प्राचीन मूर्तियों की पूजा-अर्चना के लिए पुजारी व हेल्पर को रखा गया है। इनका मानदेय, प्रसाद और रखरखाव की व्यवस्था बजाज पावर प्लांट से की जाती है। - राजीव श्रीवास्तव, वाइस प्रेसिडेंट बजाज पॉवर प्लांट चिगलौआ।


मंदिर की कोई पंजीकृत समिति न होने के कारण बजाज कंपनी से दिए गए मुआवजे की धनराशि को पीएलए में जमा दिया गया था, जो आज भी उसी में है। - अंकुर श्रीवास्तव, अपर जिलाधिकारी
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