ललितपुर। शहर में संचालित अधिकांश खनिज टाल संचालक पंजीयन क्षमता से कई गुना स्टॉक रखकर बिक्री कर रहे हैं। कुछ ने कार्रवाई से बचने के लिए कई अन्य स्थानों पर टाल खोली है तो कुछ ने जगह-जगह खनिज मटीरियल का सामान रख लिया है। इससे अवैध खनन को बढ़ावा मिल रहा है, साथ ही विभाग के राजस्व को क्षति पहुंच रही है ।
शासन ने अवैध खनन को रोकने के लिए नई नीति लागू की है। जिसमें खनिज टालों का पंजीयन कराना अनिवार्य किया है। टालों के पंजीयन की प्रक्रिया दो प्रकार से करने का प्रावधान किया गया है। जिसमें मानकों का पालन कर पंजीयन दिया जाता है। सौ घन मीटर से अधिक स्टॉक करने वाले संचालकों को विभाग में आवेदन करना होगा। जिसकी जांच तहसील स्तर से जिला प्रशासन की अनुमति की आवश्यकता होती है। मानकों पर खरा उतरने वाले आवेदकों का ही पंजीयन किया जाएगा। इसके अलावा फुटकर खनिज विक्रेताओं को भी पंजीयन करना होता है। जिसका डाटा पोर्टल पर अपलोड करना होता है। दोनों में संचालकों को बिक्री का डाटा विभाग को देना होता है। जिसमें कहां से माल की खरीद की, किसको बेची जा रही है आदि अन्य विवरण प्रत्येक तीन माह में विभाग को देना होगा।
नई नीति लागू होने के बाद राजस्व को चूना लगा रहे
नई नीति लागू होने के बाद शहर में संचालित अधिकांश टाल संचालक नियमों को धता बताकर विभाग के राजस्व को चूना लगा रहे हैं। कार्रवाई से बचने के लिए कई स्थानों पर स्टॉक बना लिए हैं। कई तो सड़क किनारे ही बनाए हैं। जिनसे यातायात तक प्रभावित हो रहा है। कई तो क्षमता से कई गुना स्टॉक कर खुलेआम बिक्री कर रहे हैं। कइयों ने सुनसान इलाकों में स्टॉक कर लिया है। जहां जांच से भी बच रहे हैं। एक हजार घन मीटर से अधिक स्टॉक पड़ा हैै।
ऐसी ही स्थिति शहर में कई स्थानों पर बनी हुई है। इनमें शहर के हाइवे मार्ग पर कई स्थानों पर सड़क किनारे ही टालें संचालित हो रही है। इसके अलावा आरटीओ नहर के पास एक स्थान पर लगभग एक हजार घन मीटर की मात्रा में खंड बोल्डर पड़े हएु हैं। इसी तरह एलआईसी कार्यालय के पीछे गली में भी एक बंद चार दीवारी में खंडों का स्टॉक पड़ा हुआ है। इसके अलावा भी शहर में कई स्थानों पर टाल संचालित हो रही है।
शहर में संचालित टालों में कई स्थानों पर क्षमता से अधिक माल स्टॉक होने व सुनसान क्षेत्रों में खनिज स्टॉक होने की जानकारी हुई है। जिसकी जांच कर कार्रवाई की जाएगी।
- मुकेश कुमार मिश्रा, जिला खान निरीक्षक